रुड़की-हरिद्वार से यूपीसीएल को तीन साल में 704 करोड़ की चपत
यूपीसीएल को रुड़की-हरिद्वार में बिजली आपूर्ति से तीन साल में 704 करोड़ की चपत लगी। रुड़की में 22.09 प्रतिशत यानी 482.72 करोड़ की बिजली का नुकसान हुआ। हरिद्वार जोन में 15.51 प्रतिशत (704 करोड़) का नुकसान हुआ। इसकी मुख्य वजह बिजली चोरी मानी जा रही है। वहीं, दो वित्तीय वर्षों में बिजली आपूर्ति से यूपीसीएल को 1696.41 करोड़ की हानि हुई। वहीं, यूजेवीएनएल ने उड़ीसा में 200 मेगावाट बिजली परियोजना की जमीन खरीद के लिए 2013 में उड़ीसा इंटिग्रेटेड पावर लिमिटेड को चेक से 35 करोड़ 93 लाख का भुगतान किया लेकिन जमीन का कुछ पता नहीं। 75.55 करोड़ ठेकेदारों व अन्य पर बकाया है। नाबार्ड से मिला 37.73 करोड़ का लोन 96 माह से बकाया है।
उरेड़ा पर निगम के 29.66 करोड़, यूपीसीएल पर जीपीएफ के 41.08 करोड़ बकाया हैं। मनेरी भाली-2 परियोजना में सिंचाई विभाग के खर्च के 60.84 करोड़ आज तक नहीं दिए। पांच जल विद्युत परियोजनाओं का 128.85 करोड़ का ब्याजमुक्त ऋण आज तक सरकार को नहीं लौटाया। बिक्री योग्य बिजली पर 10 पैसा रॉयल्टी, 30 पैसा प्रति यूनिट सेस की कुल राशि 526 करोड़ 44 लाख रुपये सरकार को नहीं दिए। यूजेवीएनएल का यूपीसीएल पर एनर्जी चार्ज, सेस व रॉयल्टी का 781.65 करोड़ बकाया है। यूपीसीएल की वजह से ग्रीन एनर्जी सेस, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की मद में राज्य सरकार को 31.03 करोड़ की हानि हुई।