टिहरी में अटालीगंगा होटल के समीप, होटल ताज के निगट सिंगटाली, कौड़ियाला पानी गदेरा के निकट, महादेव चट्टी, तोताघाटी, तीनधारा, देवप्रयाग तहसील के निकट, मूल्यागांव, पौड़ी में फरासू और चमधार, रुद्रप्रयाग में जवाड़ी बाईपास के निकट, नरकोटा, सिरोबगड़, डीएफओ ऑफिस के निकट, बांसवाड़ा में दो जगह, काकड़ागाड़, सेमी बैंड, देवीधार, ब्यूंगाड़ खुमेरा, खुुमेरा (खाट), खाट, जामू, चंडिकाधार, कालाडूंगी, मुनकटिया, वाड़ा, चुन्नी बैंड, मस्तुरा, उत्तरकाशी में धरासू, छटांगा, सिलाई बैंड, ओजरी, खराड़ी, किसाला में दो जगह और पालीगाड़ में बेहद खतरनाक लैंडस्लाइड जोन सक्रिय हैं।
वैज्ञानिक और शोधार्थी कर रहे भूस्खलन की सक्रियता पर शोध
प्रदेश में सक्रिय दीर्घकालिक भूस्खलन जोन से कैसे निपटा जाए इस मुद्दे पर कई वैज्ञानिक संस्थान और विश्वविद्यालय भी शोध कर रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक प्रोजेक्ट तहत आईआईटी मुंबई, आईआईटी रुड़की, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय, पंजाब यूनिवर्सिटी और एलएसएम राजकीय महाविद्यालय पिथौरागढ़ विभिन्न सक्रिय भूस्खलन जोन पर शोध कर रहे हैं।
उत्तराखंड में कुल 105 क्रानिक लैंडस्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं। बरसात के सीजन में फिलहाल कार्यदायी एजेंसियों की ओर से लैंडस्लाइड के कारण बंद हुए सड़क मार्ग को खोलने पर फोकस रहता है। हर लैंडस्लाइड जोन की सक्रियता और प्रकृति अलग होती है। इनका दीर्घकालीन उपचार भी अलग-अलग ढंग से ही संभव है। जिस पर संबंधित एजेंसियों की ओर से काम किया जा रहा है।
- हरिओम शर्मा, प्रमुख अभियंता, लोनिवि