राजधानी देहरादून में उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मियों का मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। ऊर्जा निगम प्रबंधन ने परिसर में धरना-प्रदर्शन कर रहे 70 से अधिक संविदा कर्मियों को सुद्धोवाला जेल भेज दिया।
हालांकि शाम को निजी मुचलके पर इन्हें रिहा कर दिया गया। निगम प्रबंधन ने परिसर में धरना-प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है। निगम प्रबंधन के कदम की कर्मचारी संगठनों ने कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि ब्रिटिश काल में भी धरना-प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई गई थी।
जबरन उठाकर जेल भेज दिया
मंगलवार सुबह 10 बजे ऊर्जा भवन के बाहर संविदा कर्मी धरने पर बैठ गए। पुलिस ने लगभग 70 संविदा कर्मियों को जबरन उठाकर जेल भेज दिया। प्रबंधन के रवैये से भड़के संविदा कर्मियों ने ऊर्जा भवन से रैली निकाली। वसंत विहार, ऊर्जा भवन, बल्लीवाला चौक, जीएमएस रोड होते हुए संविदा कर्मी जल विद्युत निगम पहुंचे। इस दौरान भाजपा नेता रवींद्र जुगरान और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट सहित अन्य मौजूद थे। शाम को संविदा कर्मियों ने परेड मैदान से गांधी पार्क, घंटाघर, कांग्रेस भवन होते हुए परेड मैदान तक कैंडल मार्च निकाला।
ऊर्जा निगम प्रबंधन विद्युत संविदा कर्मियों के आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रहा है। कर्मचारी हक की लड़ाई आखिरी दम तक लड़कर रहेंगे।
-विनोद कवि, उपाध्यक्ष उत्तराखंड विद्युत संविदा
धरना-प्रदर्शन पर अंग्रेजों ने भी रोक नहीं लगाई। ऊर्जा निगम प्रबंधन की ओर से शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन करने वालों को जेल भिजवाना गलत है। यह लोकतंत्र की हत्या है।
जेएमएस रौथाण, अध्यक्ष उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन