भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राज्य में चुनाव बाद समान नागरिक संहिता लागू कराने की घोषणा का स्वागत किया है। विजयवर्गीय ने कहा है कि किसी भी राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कराने के संबंध में यह पहला कदम होगा। यूनिफार्म सिविल कोड का दायरा विवाह, तलाक, जमीन-जायदाद और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर लागू होगा। देशभर में समान नागरिक संहिता लागू कराने के प्रबल पक्षधर और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इससे सभी पक्षों को बराबर के अधिकार मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने से पहले मसौदा तैयार करने के लिए समिति का गठन करने का फैसला भी सही कदम है। समिति सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही समान नागरिक संहिता लागू करने का ड्राफ्ट तैयार करेगी। सभी पक्षों की राय से समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद किसी को भी आपत्ति नहीं होगी। विजयवर्गीय ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के अन्तर्गत राज्यों को समान नागरिक संहिता लागू करने का अधिकार मिला है। उत्तराखंड में इस मसले पर पहल होने से देश के अन्य राज्यों को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में सरकार से जवाब मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट कई बार यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने के मसले पर अपनी राय दे चुका है।
समान नागरिक संहिता लाने वाले पांच साल कहां थे : सिसोदिया
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि चुनाव के ऐन वक्त पर समान नागरिक संहिता लाने वाले पांच साल से कहां थे। अपने चुनावी घोषणापत्र में यह बात क्यों नहीं की है। शनिवार को चुनाव प्रचार के लिए देहरादून पहुंचे सिसोदिया ने कहा कि चुनाव के समय जनता को गुमराह करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समान नागरिक संहिता की घोषणा कर रहे हैं। आखिर भाजपा सरकार पांच साल तक कहां थी। चुनाव में हार को देखते हुए भाजपा झूठी घोषणाएं कर प्रदेश की जनता से छलावा कर रही है। यदि भाजपा की मंशा समान नागरिक संहिता लाने की थी कि उसने अपने चुनावी घोषणापत्र में इसका जिक्र क्यों नहीं किया है। ब्यूरो