विकास और डबल इंजन के करिश्मे के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर ने भाजपा के लिए खेवनहार का काम किया। हालात यह रहे कि खुद भाजपा अपने जिन प्रत्याशियों की जीत को खतरे में मानकर चल रही थी, उन सीटों पर भी मोदी लहर ने नैया पार लगा दी।
इस बार के विधानसभा चुनाव में न महंगाई की बात चली और न ही बेरोजगारी के मुद्दे का असर दिखा। न फ्री बिजली ने मतदाताओं को लुभाया और न ही बेरोजगारी भत्ता लोगों को पसंद आया। आखिरकार मोदी मैजिक ने ही भाजपा को लगातार दूसरी बार जीत दिलाई।
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विधानसभा चुनाव से पहले वैसे तो तमाम मुद्दों को लेकर पार्टियां अपने-अपने दावे कर रही थीं। कांग्रेस जहां महंगाई और बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा मानकर मैदान में उतरी थी तो वहीं आम आदमी पार्टी भी फ्री बिजली, पानी, बेरोजगारी भत्ते का वादा लेकर अपनी किस्मत आजमाने आई थी। विपक्षी दल यह भी मानकर चल रहे थे कि इस बार जहां एंटी इनकंबेंसी है तो दूसरी ओर मोदी लहर का असर भी कम हो गया है, लेकिन दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिशों में जुटी भाजपा ने इन सबसे इतर अपने अंदाज में चुनाव लड़ा।
विकास और डबल इंजन के करिश्मे के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर ने भाजपा के लिए खेवनहार का काम किया। हालात यह रहे कि खुद भाजपा अपने जिन प्रत्याशियों की जीत को खतरे में मानकर चल रही थी, उन सीटों पर भी मोदी लहर ने नैया पार लगा दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निश्चित तौर पर महंगाई, बेरोजगारी कहीं मुद्दे थे लेकिन मोदी लहर के सामने वह काफी कमतर थे। बचा काम मुस्लिम यूनिवर्सिटी और सीएम धामी के समान नागरिक संहिता के बयान ने पूरा कर दिया।