वर्ष 2012 में तत्कालीन सीएम मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी की अप्रत्याशित हार से चर्चाओं में आई पौड़ी जिले की कोटद्वार विधानसभा सीट इस बार उनकी बेटी ऋतु खंडूड़ी के चुनाव में उतरने से एक बार फिर चर्चाओं में है। उनकी जंग कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से होगी। इस बार के चुनाव में भाजपा से बागी हुए निर्दलीय प्रत्याशी धीरेंद्र चौहान मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। पूर्व सैनिक पृष्ठभूमि के धीरेंद्र चौहान से भाजपा के साथ ही कांग्रेस की भी नींद उड़ी हुई है।
इस बार कोटद्वार विधानसभा सीट से 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। दोनों राष्ट्रीय दल जहां एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर, शाम, दाम, दंड, भेद की राजनीति और लोक लुभावने वायदे कर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी और छोटे दल राष्ट्रीय दलों की नाकामियों को गिनाकर जनसमर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
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कोटद्वार विधानसभा इस बार इसलिए हॉट सीट मानी जा रही है कि यहां से भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की बेटी को चुनाव मैदान में उतारा है। वह मोदी फैक्टर के भरोसे पिता का बदला लेने के लिए कांग्रेस के 72 वर्षीय कद्दावर कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को चुनौती दे रही हैं। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस बारी-बारी सत्तासीन रही, लेकिन इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के गणित में आम वोटर मौन साधे हुए है, जिससे भाजपा के साथ ही कांग्रेसी खेमे में भी बेचैनी नजर आ रही है।
2012 में इस सीट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी चुनाव हार गए थे। जिसके कारण भाजपा को एकमात्र सीट से सत्ता से बाहर होना पड़ा था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आए डा. हरक सिंह रावत को प्रत्याशी बनाया और कांग्रेस से सीट छीन ली। हालांकि तब हरक सिंह रावत ने भी जनरल खंडूड़ी की हार का बदला लेने का मुद्दा उछाला था।
इस सीट पर क्षेत्रवाद और जातिगत समीकरण की हवा ज्यादा बहती है। मैदानी क्षेत्र से यहां बसागत करने वाले मतदाता निर्णायक माने जाते रहे हैं। जिनपर आप प्रत्याशी अधिवक्ता अरविंद वर्मा सेंधमारी कर मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। बसपा के साथ ही अन्य छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी भी राष्ट्रीय दलों की मुश्किलें बढ़ाते नजर आ रहे हैं।
मतदाता
कुल मतदाता-1,14842
पुरुष- 57,501
महिला-57,340
थर्ड जेंडर- 01
संक्षिप्त इतिहास
राज्य गठन के बाद वजूद में आई यह सीट अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय में लैंसडौन में समाहित थी। वर्ष 2002 और 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह नेगी जीते। वर्ष 2007 में भाजपा के शैलेंद्र सिंह रावत और 2017 में भाजपा प्रत्याशी के रुप में डा. हरक सिंह रावत यहां चुनाव जीते।
प्रमुख मुद्दे
मेडिकल कालेज, कोटद्वार जिला निर्माण, केंद्रीय विद्यालय, स्मार्ट सिटी, अंतरराज्यीय बस अड्डा, कण्वाश्रम में पर्यटन विकास, बेस अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं आदि मुद्दे।
पिछले 70 सालों में कांग्रेस ने कुछ नहीं किया, जबकि भाजपा ने सबका साथ, सबका विकास नारे के साथ पांच साल में हर वर्ग के लिए योजनाएं लागू कर प्रदेश का विकास किया। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम धरातल पर हुआ। केंद्र सरकार की आवास योजना समेत राज्य सरकार की योजनाओं का सभी वर्गों को लाभ मिला है। इस बार आम जनता के साथ ही बड़ी संख्या में महिलाएं मोदी और धामी सरकार के काम पर मुहर लगाएंगी।
- ऋतु खंडूड़ी, भाजपा प्रत्याशी
पिछले पांच सालों में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। पूर्ववत्ती कांग्रेस के सरकार में स्वीकृत कार्यों को रोककर भाजपा ने विकास विरोध सोच का परिचय दिया है। कांग्रेस ही क्षेत्र का विकास कर सकती है। कोटद्वार के विकास का खाका तैयार कर लिया गया है और जनता परिवर्तन का मना बना चुकी है। इस बार कांग्रेस की सरकार बननी तय है।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, कांग्रेस प्रत्याशी
भाजपा और कांग्रेस बारी-बारी सत्तासीन हुई हैं, लेकिन दोनों राष्ट्रीय दलों ने क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया। कंडी रोड, लालढांग-चिलरखाल मोटर मार्ग का निर्माण, मेडिकल कालेज, केंद्रीय विद्यालय, मोटर नगर बस अड्डा सहित कई वायदे वायदे ही रह गए। क्षेत्र का विकास वहीं कर सकता है, जो स्थानीय लोगों की पीड़ा को समझते हुए ईमानदारी से काम करें।
- धीरेंद्र चौहान, निर्दलीय प्रत्याशी