24 दिसंबर को देश के मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा देहरादून आए थे। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। जिसमें आयोग ने कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए राजनीतिक दलों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि रोड शो के दौरान अधिकतम पांच वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त की इस अपील का अभी तक किसी भी राजनीतिक दल पर कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
रैलियों का वर्चुअल माध्यम नहीं भा रहा दलों को
वैसे तो पूर्व में भाजपा सहित कुछ दलों ने वर्चुअल माध्यम से रैलियां शुरू कीं थीं लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा खत्म हो गई। दरअसल, नेता अपने-अपने क्षेत्र में भीड़ को इकट्ठा करते थे। उनके लिए ऑनलाइन भाषण सुनने की व्यवस्था कराई जाती थी। पार्टी का नेता अपने आवास से उन्हें ऑनलाइन संबोधित करता था। इसे इसलिए भी नाकाफी माना गया क्योंकि इसमें नेता तो सुरक्षित हो रहे थे लेकिन जनता नहीं। अब एक बार फिर वर्चुअल माध्यमों से चुनावी रैलियों की मांग पुरजोर होने लगी है।
चुनाव आयोग से मांग, तत्काल लगे रैलियों पर रोक
तेजी से प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना मामलों के बीच अब चुनाव आयोग के सामने रैलियों पर रोक लगाने की मांग भी उठने लगी है। एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक और कोरोना महामारी से जुड़े तथ्यों के विश्लेषक अनूप नौटियाल ने चुनाव आयोग को ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के कोविड पॉजिटिव आने के साथ ही यह आशंका प्रबल होने लगी है कि यह रैलियां सुपर स्प्रेडर साबित हो सकती हैं। लिहाजा, चुनाव आयोग इस तरह की सभी चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगाए। इसके बजाए जनता तक पहुंचने के अन्य माध्यमों का प्रयोग का रास्ता खोला जाए।
कोरोना की दूसरी लहर बेहद खौफनाक थी। कुंभ के बाद कोरोना संक्रमण की गति कई गुना हो गई। दूसरी लहर में अप्रैल और मई में नौ ऐसे हफ्ते थे, जिसमें हर हफ्ते पांच हजार कोरोना संक्रमण के मामले आए। चार अप्रैल 2021 से यह सिलसिला शुरू हुआ। दो से आठ मई की अवधि में 52369 मामले कोरोना संक्रमण के थे। यह कोरोना महामारी की प्रदेश में सबसे चरम स्थिति थी। इस दौरान 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
तारीख मामले
29 दिसंबर 38
30 दिसंबर 59
31 दिसंबर 88
01 जनवरी 118
02 जनवरी 259
03 जनवरी 189
04 जनवरी 310