पूर्व सीएम हरीश रावत को भले ही पंजाब कांग्रेस प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है, लेकिन उनका दिल उत्तराखंड के लिए ही धड़कता है। यही वजह है कि वह पिछले दिनों पंजाब का प्रभार छोड़ने की बात कह चुके हैं। अपने इस निर्णय से उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी अवगत करा दिया था। लेकिन उन्हें पंजाब का मसला सुलझने तक पद पर बने रहने के निर्देश मिले हैं।
पंजाब कांग्रेस में पिछले लंबे समय से कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच उपजा सियासी विवाद शनिवार को सतह पर आ गया। इसके बाद पंजाब प्रभारी होने के नाते एक बार फिर पूर्व सीएम हरीश रावत पंजाब की राजनीति के केंद्र में आ गए। उन्हें यहां परिवर्तन यात्रा का अपना कार्यक्रम छोड़कर पहले दिल्ली और फिर चंडीगढ़ की राह पकड़नी पड़ी।
हरिद्वार में परिवर्तन यात्रा के दूसरे चरण की यात्रा में पहले दिन मैं शामिल नहीं हो पाया। लेकिन इस बीच पार्टी नेताओं से फोन पर लगातार संपर्क बना रहा। मैंने आज फोन पर ही रानीपुर में हुई सभा को संबोधित भी किया। हरिद्वार में परिवर्तन यात्रा में जिस तरह से लोगों का समर्थन कांग्रेस को मिल रहा है, उससे स्पष्ट है कि लोग राज्य में अब सत्ता परिवर्तन का मन बना चुके हैं। कांग्रेस इस बार बहुमत से सरकार बनाएगी। जहां तक पंजाब कांग्रेस का मसला है, हम इसे सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं। शीघ्र ही कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा।
- हरीश रावत, पूर्व सीएम व चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष