फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand Election 2022: भाजपा और कांग्रेस में हुई बगावत से बिगड़ रहे समीकरण 

Wed, 09 Feb 2022 01:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संवाद न्यूज एजेंसी, नई टिहरी

सार

घनसाली विधानसभा सीट 2012 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुए थी।
 
विज्ञापन
भाजपा-कांग्रेस - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घनसाली विधानसभा सीट त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी हुई है। इस सीट पर भाजपा से शक्ति लाल शाह, कांग्रेस से धनी लाल शाह से लेकर कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय भीम लाल आर्य दमखम से चुनावी समर में उतरे हैं। जिससे घनसाली का रण रोचक होता जा रहा है।

विज्ञापन


प्रमुख रूप से तीनों प्रत्याशियों के समर्थक मतदाताओं के घर-घर दस्तक देकर वोट मांग रहे हैं। लेकिन मतदाता अभी अपने पत्ते नहीं हो रहे हैं। जिससे प्रत्याशियों की भी चिंताएं बढ़ रही है। घनसाली विधानसभा सीट 2012 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुए थी।

आरक्षित होने के बाद हुए दो चुनाव में भाजपा प्रत्याशी 13 से लेकर 14 हजार वोटों से जीते हैं। लेकिन इस बार भाजपा और कांग्रेस से बागवत कर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने समीकरण बिगाड़ दिया है। भाजपा ने सिटिंग विधायक शक्ति लाल शाह को टिकट दिया है। जिससे नाराज भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक दर्शन लाल आर्य निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Uttarakhand Elections : हाई प्रोफाइल सीटों पर हो सकता है पैसे का खेल, आयोग के रडार पर सात विधानसभा सीटें

जबकि कांग्रेस ने पूर्व प्रमुख धनी लाल शाह को टिकट दिया है, तो पूर्व विधायक भीम लाल आर्य ने भी बगावत कर निर्दलीय ताल ठोक रहे है। भाजपा प्रत्याशी शक्ति लाल अपने कार्यकाल में किए विकास कार्यो और पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं।

इससे पहले दो बार चुनाव हार चुके कांग्रेस प्रत्याशी धनी लाल अपना अंतिम चुनाव बताकर वोटरों को भावनात्मक लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। निर्दलीय भीम लाल आर्य 2012 से 2017 विधायक रहते हुए किए गए कार्यो के नाम पर वोट की अपील कर रहे हैं। यहां से यूकेडी, आप समेत कुल सात प्रत्याशी मैदान में हैं। सभी प्रत्याशी मतदाताओं के घर-घर दस्तक देकर वोट मांग रहे हैं। लेकिन मतदाता अभी खामोश में हैं

संक्षिप्त इतिहास-
राज्य बनने के बाद अस्तित्व में आई घनसाली सीट पर पहली बार 2002 एनसीपी के और 2007 में कांग्रेस के टिकट बलवीर सिंह नेगी विधायक जीते। 2012 में आरक्षित होने के बाद भाजपा से भीम लाल आर्य और 2017 में भाजपा से ही शक्ति लाल शाह विधायक जीते। 
मतदाता-
महिला     46,165      
पुरुष      47,907 
कुल       94,052

विज्ञापन

स्थानीय मुद्दे

बालगंगा विकास खंड का गठन, क्षेत्र में पॉलीटेक्निक, राजकीय महाविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, , अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, उपकरण, डॉक्टरों की नियुक्तियां। सहसस्ताल, मासरताल, पांवली बुग्याल, खतलिंग, बुढ़ाकेदार समेत अन्य धार्मिक और रमणिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करवाना, बालगंगा महाविद्यालय सेंदुल केमर का राजकीयकरण, भिलंगना के सीमांत क्षेत्रों में संचार सुविधाएं मुहैया करवाना।

इनका कहना है
पांच साल में विधायक के रूप में दूरस्थ  गंगी, गेवांली, पिनस्वाड़, लोदस सहित 100 सड़कों का निर्माण, डामरीकरण, घनसाली और चमियाला नगर पंचायत का भवन, ट्रेचिंग ग्राउंड, पार्किंग, घनसाली बस अड्डा, जीआइसी केमरा, नौल बासर, तलेवन, भट्टगांव का भवन निर्माण कराया। घुमेटीधार में मिनी स्टेडियम, हैलीपैड़, बालगंगा महाविद्यालय के विकास को दो करोड़ की स्वीकृति समेत क्षेत्र का समग्र विकास किया है। 
-शक्ति लाल शाह, भाजपा प्रत्याशी घनसाली।  

घनसाली क्षेत्र में भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने 10 के कार्यकाल में बर्दाद किया। क्षेत्र के अस्पतालों में डाक्टर, उपकरणों की कमी बनी हुई है। पॉलीटेक्नीक, महाविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहीं खुल पाए हैं। क्षेत्र की सड़कें खस्ताहाल है। महंगाई से जनता त्रस्त है। रोजगार के लिए युवा भटक रहे है। इस चुनाव में इनका जनता जवाब जरूरी देगी।
-धनी लाल शाह, कांग्रेस प्रत्याशी घनसाली।   

इस बार जनता राष्ट्रीय दलों के छलवा में आने वाली नहीं है। मैंने विधायक रहते हुए सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल समेत हर क्षेत्र में काम किया है। मेरे काम के आधार जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। यदि जनता ने वोट के रूप में आशीर्वाद दिया, तो पूर्व के अधूरे कार्यो को पूरा करवाया जाएगा। बालगंगा को पृथक तहसील का दर्जा दिलवाया।
-भीम लाल आर्य, निर्दलीय प्रत्याशी घनसाली। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें