इस बार किसी से मुकाबला नहीं है। एकतरफा भाजपा की लहर है। जनता के दिल में मेरे प्रति प्रेम व अटूट विश्वास है। विकास के कार्यों के दम पर चुनाव जीतूंगा। कार्यकर्ताओं के साथ ही मतदाताओं में भी उत्साह है। रेलवे लाइन निर्माण, लंबित भूमिधरी अधिकार और बंगालियों को ओबीसी का दर्जा दिलाने के लिए काम किया जाएगा।
-सौरभ बहुगुणा, प्रत्याशी भाजपा।
बीजेपी से मुकाबला है। जनता का उत्साह देखते हुए जीत के प्रति आश्वस्त हूं। बेरोजगारी दूर करना, किसानों को उनका हक दिलाना, विकास कार्य, महिला सशक्तिकरण के लिए काम प्राथमिकता में हैं। अस्पतालों को उच्चीकृत कर उनमें स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई जाएंगी। चीनी मिल को पहले की तरह सरकार चलाएगी, बड़े उद्योग लाकर स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए काम होगा। -नवतेज पाल सिंह, प्रत्याशी कांग्रेस।
मुकाबला एकतरफा हो गया है। बसपा की जीत सुनिश्चित हो गई है। अन्य दल रनरअप के लिए जद्दोजहद में लगे हैं। चीनी मिल चालू कर उसमें एथनॉल व विद्युत संयंत्र लगाकर मिल को आगे बढ़ाऊंगा। शक्तिफार्म में डिग्री कालेज की स्थापना कराना, वहां के अस्पताल को उच्चीकृत कर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाना, बैगुल व धौरा जलाशय में बसे लोगों को भूमिधरी अधिकार दिलाना प्रथामिकता रहेगी। खेलकूद के लिए स्टेडियम बनाए जाएंगे।
-नारायण पाल, प्रत्याशी बसपा।
भाजपा से सीधे मुकाबला है। भाजपा की जनविरोधी नीतियों की वजह से जनता अब परिवर्तन चाहती है। आप को लेकर मतदाताओं में बेहद उत्साह है। भारी मतों से जीतेंगे। सिडकुल में ठेकेदारी प्रथा खत्म की जाएगी। कच्चे मकान पक्के किए जाएंगे। जलाशय क्षेत्र से सटे गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाएंगे। सड़क, बिजली, पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा, हर महिला को प्रति महीने एक हजार रुपये, पांच हजार बेरोजगारी भत्ता, तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी।
-अजय जायसवाल, प्रत्याशी, आप।
2002 और 2007 में बसपा के नारायण पाल, परिसीमन के बाद 2012 में भाजपा के किरन चंद्र मंडल विधायक बने, लेकिन विकास की शर्त पर सीट छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए और उपचुनाव में कांग्रेस के सीएम विजय बहुगुणा विधायक बने। 2017 में पूर्व सीएम बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा भाजपा विधायक बने।
मतदाता
कुल-1,22,713
पुरुष-64283
महिला-58427
ट्रांसजेंडर-03
स्थानीय मुद्दे
तीन दशक से भी पुरानी रेलवे लाइन निर्माण, सितारगंज की दि किसान सहकारी चीनी मिल चलाने, किसानों की फसलों को वाजिब दाम, तौल केंद्रों पर फसलों की सुगमता से बिक्री, सिडकुल का विकास, रोजगार, शक्तिफार्म में सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं देने के मुद्दे हैं। बंगालियों की वर्षों पुरानी एससी की मांग के सिरे न चढ़ने पर अब पिछले छह महीनों से ओबीसी के आरक्षण का मुद्दा गरमाया है। खरीद फरोख्त की पट्टे वाली भूमि पर मालिकाना हक, वन व जलाशय की भूमि पर बसे लोगों को भूमिधरी अधिकार, मुस्लिमों के लिए मदरसों की स्थापना, आधुनिकीकरण आदि मांगें प्रमुख हैं।