प्रदेश में लोकायुक्त का कुछ अता पता नहीं है, लेकिन पिछले कई सालों से लोकायुक्त कार्यालय पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के मुताबिक लोकायुक्त कार्यालय में वर्ष 2020-21 में स्टाफ और अन्य पर 1.10 करोड़ रुपये खर्च हुए।
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 100 दिन में लोकायुक्त बनाने की घोषणा की थी। सरकार साढ़े चार साल बाद भी लोकायुक्त पर एक कदम भी आगे बढ़ नहीं पाई। लोकायुक्त बिल जहां का तहां पड़ा है। चुनाव में जनता पूछेगी कि लोकायुक्त कहां है? पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी।
- गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
भाजपा सरकार के गठन के दिन से ही हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर मजबूती से काम किया। साढ़े चार साल में हमने भ्रष्टाचार मुक्त शासन दिया और यह हमारा संकल्प भी है। हमारा मत है कि ऐसी सरकार चलनी चाहिए कि लोकायुक्त की जरूरत ही न पड़े।
- मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
भाजपा सरकार के पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति और 100 दिन में लोकायुक्त लाने की घोषणा की थी। सरकार ने विस में लोकायुक्त बिल लाने का नाटक किया। विपक्ष के सभी 11 सदस्यों ने बिल को पारित करने का समर्थन किया। विपक्ष की आपत्ति पर बिल प्रवर समिति को जाते हैं, लेकिन पहली बार सरकार की ओर से इसे प्रवर समिति को भेजा गया। हाथी के दांत दिखाने और खाने के और हैं। सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है और लोकायुक्त बनाने की उसकी कोई मंशा नहीं है।
- प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष