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उत्तराखंड: भाजपा-कांग्रेस से चुनाव लड़कर दो बार विधायक बने राजकुमार, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मिली थी हार 

Sun, 12 Sep 2021 11:12 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

Uttarakhand Election 2022 : राजकुमार के पिता पतिदास ने भी वर्ष 1985 उत्तरकाशी से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। उस दौरान से ही उनका परिवार कांग्रेस से जुड़ा है।
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भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस विधायक राजकुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा सीट से विधायक राजकुमार भाजपा और कांग्रेस से चुनाव लड़कर दो बार विधायक बने, लेकिन 2012 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लगभग 14 सालों के बाद राजकुमार ने दोबारा से भाजपा में वापसी की है।

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उत्तराखंड में कांग्रेस को झटका: भाजपा में शामिल हुए एक और विधायक, दिल्ली में सीएम भी रहे मौजूद

राजकुमार के पिता पतिदास ने भी वर्ष 1985 उत्तरकाशी से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। उस दौरान से ही उनका परिवार कांग्रेस से जुड़ा है। राजकुमार ने देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा ली। लेकिन छात्र राजनीति में कभी भी सक्रिय नहीं रहे।
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उत्तराखंड राज्य बनने के बाद राजकुमार भाजपा से जुड़े। वर्ष 2007 में उन्होंने सहसपुर (आरक्षित) सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और पहली बार जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वर्ष 2012 सहसपुर सीट सामान्य हो गई थी। जिससे उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए विधानसभा सीट बदली और पुरोला सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस बार चुनाव में वे हार गए। 2017 में कांग्रेस के टिकट पर पुरोला से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वर्तमान में वे विधायक हैं। चुनाव से पहले राजकुमार ने कांग्रेस छोड़ कर फिर से भाजपा में वापसी की है।

राजकुमार कमजोर कड़ी थे, जो वक्त से पहले टूट गए: कांग्रेस

पुरोला सीट से कांग्रेस के विधायक राजकुमार ने रविवार को बीजेपी का दामन थाम लिया। जिसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ऐसा नहीं मानते, उनका कहना है कि राजकुमार एक कमजोर कड़ी थे, जो वक्त से पहले टूट गए। कहा कि विधायक राजकुमार ने जनादेश और पुरोला की जनता का अपमान किया है।

गोदियाल ने कहा कि भाजपा का तोड़फोड़ की राजनीति का पुराना इतिहास रहा है, इससे पहले भी उन्होंने जनादेश का अपमान कर उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गोवा सहित कई अन्य राज्यों में विपक्षी दल के विधायकों को धन का लालच देकर तोड़फोड़ की है। 

कहा कि भाजपा को उत्तराखंड में अपनी हार सुनिश्चित लग रही है। उसके पास चुनाव लड़ने लायक चेहरे नहीं बचे हैं, इसलिए वह कांग्रेस और अन्य दलों के लोगों को लालच देकर अपनी पार्टी में शामिल कर रही है।

राजकुमार की स्थिति क्षेत्र में अच्छी नहीं थी
गोदियाल ने कहा कि राजकुमार हमारी एक कमजोर कड़ी थे। उनकी राजनीतिक स्थिति उनके विधानसभा क्षेत्र में कैसी थी, यह बात किसी से छुपी नहीं है। उन्होंने अपने बचाव के मकसद से पार्टी बदली है, लेकिन क्षेत्र की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। उन्होंने खुद ही संगठन को छोड़कर सही काम किया। अब कांग्रेस अपने जमीन से जुड़े पकड़ वाले उम्मीदवार को टिकट देकर एक सीट पक्की करने का काम करेगी।
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कार्रवाई करने के लिए करेंगे अपील

गोदियाल ने कहा कि राजकुमार के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग करेगी। इसके अलावा उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की जाएगी। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह से इस बारे में बातचीत कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

किसी छोटे कार्यकर्ता के जाने का भी दुख होता है। पार्टी ने बड़े अरमान से उन्हें टिकट दिया था, वह जीते भी थे। लेकिन अब भाजपा के प्रलोभन में आ गए। यूं तो उनका क्षेत्र में रिकार्ड अच्छा नहीं था। उन्होंने जनता के साथ धोखा किया है। भाजपा भी इस बात को जान चुकी थी, इसलिए इतने दिन से उन्हें लेने से हिचकिचा रही थी। राजनीति में चुनाव से ऐन पहले इस तरह दल बदलने की परंपरा ठीक नहीं है। ऐसे लोगों को जनता को दंडित करना चाहिए। 
- हरीश रावत, अध्यक्ष, कांग्रेस चुनाव संचालन समिति व पूर्व सीएम 

जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो कांग्रेस में आ गए। अब फिर कांग्रेस से किनारा कर भाजपा में चले गए। लोकतंत्र है, कोई कहीं भी जा सकता है। यह तो उन्हें और जनता को तय करना है, उनका भविष्य क्या होगा। 
- प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस

राजकुमार ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में क्षेत्र की जनता की उपेक्षा की। अब उन्हें हार का डर सता रहा था, जिसके चलते वह पुरोला की जनता की भावनाओं को गिरवी रखकर मोटा सौदा कर भाजपा में शामिल हो गए हैं।
- मथुरा दत्त जोशी, महामंत्री पार्टी संगठन
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