त्रिवेंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी अटल आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए बुजुर्गों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। अब सरकार कार्ड बनवाने में असमर्थ बुजुर्गों के घर पर जाकर ही कार्ड बनाएगी। इससे उन बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी। जो जनसेवा केंद्रों तक नहीं पहुंच सकते हैं।
योजना में अब तक 33 लाख लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बने हैं, लेकिन करीब 66 लाख लाभार्थी ऐसे हैं, जिनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पाया है। इसके लिए सरकार ने विशेष अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान से उम्मीद है कि प्रदेश में 80 प्रतिशत से अधिक पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बन जाएंगे। एक साल से कम समय में प्रदेश के एक लाख 10 हजार लाभार्थियों को योजना से लाभ मिला है।
जिसमें 11 हजार ऐसे मरीज थे, जो कैंसर, हृदय रोग, किडनी, न्यूरो सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। आयुष्मान योजना की चुनौतियों और बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति पर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दिलीप कुमार कोटिया ने वरिष्ठ संवाददाता भूपेंद्र राणा से विशेष बातचीत की।
सवाल : आयुष्मान योजना को एक साल पूरा होने वाला है। शुरूआत में किस तरह की चुनौतियां सामने आई?
जवाब : किसी भी योजना को शुरू करने में कुछ दिक्कतें आती है। मैं मानता हूं कि सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पारदर्शिता के साथ योजना को क्रियान्वित कर पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित करना था। इसमें कोई कमी रह जाए तो अच्छी से अच्छी स्कीम भी फेल जाती है। योजना में पारदर्शिता बनाने में हम कामयाब हुए हैं।
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सवाल : आधे से अधिक लाभार्थियों के कार्ड ही नहीं बने, फिर कैसा कैशलेस इलाज?
जवाब : आयुष्मान योजना के दायरे में प्रदेश के 25 लाख परिवार हैं। इसमें सात लाख परिवार केंद्रीय स्कीम ईएसआई, ईसीएचएस, सीजीएचएस में कवर हैं। इसके अलावा सरकार की स्वीकृति के बाद तीन लाख कर्मचारियों व पेंशनरों और उनके आश्रितों के 13.5 लाख कार्ड बनाए जाएंगे। वर्तमान में 15 लाख परिवारों में 63 लाख लाभार्थियों में 33 लाख के कार्ड बन चुके हैं। प्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया गया है।
सवाल : गोल्डन कार्ड मरीजों से अस्पतालों में जांच के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। इसमें कितनी सच्चाई है?
जवाब : आयुष्मान योजना में कुछ मरीजों की ओर से इस तरह शिकायतें मिली थी। योजना में सूचीबद्ध कोई भी अस्पताल मरीज से एक रुपया भी नहीं वसूला सकता है। इस तरह की शिकायतों को देखते हुए क्लेम का भुगतान करने से पहले मरीजों से भी मोबाइल पर संपर्क कर यह पता किया जाता है कि उनसे अस्पताल ने कोई पैसा तो नहीं लिया। साथ ही क्लेम की जांच के लिए डेली क्विक ऑडिट सिस्टम शुरू किया गया। गड़बड़ी पाए जाने पर क्लेम को निरस्त किया जाता है।
सवाल : अब तक कितने कार्ड धारकों को योजना का लाभ मिला?
जवाब: योजना शुरू होने से अब तक 1.10 लाख मरीजों का कैशलेस इलाज किया गया है। इन पर 105 करोड़ की राशि क्लेम के रूप में भुगतान किया गया। प्रति मरीज के इलाज पर औसतन 10 हजार रुपये का खर्च आया है। 11 हजार मरीजों को कैंसर, हृदय रोग, किडनी, न्यूरो सर्जरी समेत अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज किया गया।