पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्य के लोगों के बीच रोटी-बेटी के संबंधों को राजनीतिक दल भी खूब भुना रहे हैं।
सभी प्रमुख दलों ने स्थानीय नेताओं को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार में लगा दिया है। दस अप्रैल को होने वाले प्रथम चरण के चुनाव में उत्तराखंड के स्थानीय नेताओं ने यूपी में डेरा डाल रखा है।
उत्तराखंड को अलग हुए 13 साल का समय गुजर गया है, लेकिन आज भी हरिद्वार जनपद की अधिकांश पुरानी एवं नई रिश्तेदारियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, शामली, मुरादाबाद आदि जिलों में हैं। लाखों की संख्या में उत्तराखंड के रिश्तेदार यूपी के इन क्षेत्रों में बसे हुए हैं।
दस लोकसभा सीटों पर है इनका असर
दस अप्रैल को होने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दस लोकसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भाजपा, कांग्रेस, बसपा एवं सपा ने जनपद के नेताओं को इन क्षेत्रों में पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के चुनाव में प्रचार में भेजा हुआ है।
भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य सुशील त्यागी एवं रुड़की नगर मंडल युवा मोर्चा के मंडलाध्यक्ष वरूण त्यागी मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी डा. संजीव बालियान के पक्ष में चरथावाल ब्लाक के त्यागी बाहुल्य क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
कांग्रेस के पूर्व जिला महासचिव ठाकुर विरेंद्र सिंह समेत उनके साथ कई कांग्रेसी नेता सहारनपुर में पार्टी प्रत्याशी इमरान मसूद के लिए वोट मांग रहे हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष मेघराज जरावरे एवं सपा के युवजन सभा के राष्ट्रीय महामंत्री चंद्रशेखर यादव तो एक तरफा ही प्रत्याशियों को जिताने के लिए पिछले एक करीब सप्ताह से यूपी में ही डटे पड़े हैं।
जातियों के हिसाब से भेजा जा रहा क्षेत्रों में
पार्टी की ओर से नेताओं को जातियों के हिसाब से यूपी के लोकसभा क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। जिस क्षेत्र में जो जातियां अधिक हैं, उन क्षेत्रों में यूके उन्हीं जातियों के बड़े नेताओं को भेजा जा रहा है।
ये नेता अपनी जातियों के लोगों के साथ बैठकें कर अपनी पार्टियों के प्रत्याशियों के पक्ष में वोट करने की अपील रिश्तेदारों से कर रहे हैं।
लेकिन देखना यह होगा कि पार्टी की ओर से भेजे जा रहे नेताओं का कितना जादू किस पार्टी के सिर चढ़कर बोलता है और यूपी के प्रत्याशियों को कौन कितनी वोट दिला पाता है।
बाद में चुनाव का भी मिल रहा लाभ
पश्चिमी यूपी की दस सीटों एवं उत्तराखंड में चुनाव की तिथियों में करीब एक माह का अंतराल होने का भी पार्टियों का फायदा मिल रहा है।
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पश्चिमी यूपी में जहां दस अप्रैल को मतदान होना है वहीं उत्तराखंड में सात मई को चुनाव है। जिसमें एक माह का अंतर होने से यूके के नेता आराम से अधिक से अधिक समय यूपी चुनाव में दे रहे हैं।