गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की 32 इको टूरिस्ट सर्किट अब वर्ल्ड क्लास बनाई जाएंगी। अभी तक पर्यटकों की नजरों से दूर इन दर्शनीय स्थलों पर सुविधाएं विकसित करने और इन्हें विश्व पटल पर लाने के लिए उत्तराखंड इको टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड के गठन संबंधी आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी बोर्ड के गठन की तैयारी शुरू हो गई।
वनों और वन्य जीव स्थलों को इको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी अब यह कंपनी संभालेगी। इससे प्रदेश की आर्थिकी के मजबूत होने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन पर अंकुश लगेगा। उत्तराखंड के बहुत से ऐसे प्राकृतिक स्थल हैं जो गुमनामी में हैं। ऐसे बेशकीमती दर्शनीय स्थलों को सामने लाने की रणनीति राज्य सरकार ने बनाई है।
इसकी जिम्मेदारी वन विभाग के बजाय अब अलग से गठित एक कंपनी को दी जा रही है। वन विभाग ने सर्वे कर ऐसी 32 इको सर्किट चिह्नित की हैं। इनमें 16 गढ़वाल और 16 कुमाऊं में हैं। इन सर्किटों का विकास कायदे से हो सके और बाहर से आने वाले पर्यटकों को सुविधाएं मिलें आदि व्यवस्था के लिए कैबिनेट ने कारपोरेशन बनाने का निर्णय लिया था।
फरवरी में कैबिनेट ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। शासन ने इस संबंध में अब शासनादेश जारी किया है। इसके साथ ही कंपनी एक्ट के तहत बोर्ड के गठन की तैयारी शुरू हो गई है। इको टूरिज्म स्थलों पर प्राथमिकता के आधार स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा। पर्यटकों को रहने, खाने आदि की व्यवस्था इन्हीं क्षेत्रों में रहेगी। यहां व्यापारिक गतिविधियां भी शुरू की जाएंगी। शासनादेश में कहा गया है कि उत्तराखंड इको टूरिज्म कारपोरेशन में राज्य सरकार के शेयर की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं होगी।
कंपनी का स्वरूप
कंपनी एक्ट के तहत उत्तराखंड इको टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड के निदेशक मंडल में कम से कम तीन या सात निदेशक होंगे। चेयरमैन अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण रहेंगे। कंपनी के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भारतीय वन सेवा के अधिकारी को दी जाएगी। कंपनी की शुरुआती पूंजी कम के कम पांच करोड़ रुपये होगी।
शासनादेश जारी हो गया है, कंपनी एक्ट के तहत पंजीकरण की कार्रवाई की जा रही है। इको सिस्टम प्रदेश की बेशकीमती संपदा है। इससे राज्य की आर्थिकी मजबूत होगी।
- डॉ. कपिल जोशी, मुख्य वन संरक्षक (इको टूरिज्म)