प्रदेशभर के महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को दस मार्च के बाद टैबलेट के लिए पैसा मिलना था। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. पीके पाठक के मुताबिक सभी महाविद्यालयों को इसके लिए पैसा दिया जा चुका है। आचार संहिता लगने की वजह से इसमें कुछ देरी हुई है, लेकिन अभी भी छात्रों को पैसा देने में देरी हो रही है।
उच्च शिक्षा विभाग में सिस्टम की सुस्ती के चलते छात्र-छात्राओं को टैबलेट के लिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। जबकि शासन की ओर से इस मद में 126 करोड़ की धनराशि चार जनवरी को मंजूर की जा चुकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रयास किया जा रहा है कि जल्द छात्रों को डीबीटी के माध्यम से इसके लिए पैसा दिया जाए।
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मुख्यमंत्री की घोषणा पर राजकीय महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मुफ्त टैबलेट दिया जा सके, इसके लिए 126 करोड़ की धनराशि मंजूर कर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। हर जिले में गठित इस समिति में विभागीय नोडल अधिकारी, महाविद्यालय प्राचार्य एवं पीटीए अध्यक्ष को शामिल किया गया था, लेकिन माध्यमिक शिक्षा में जहां अधिकतर छात्र-छात्राओं को डीबीटी के माध्यम से टैबलेट का पैसा मिल चुका है।
वहीं, उच्च शिक्षा में अधिकतर छात्र-छात्राओं को अब तक इसके लिए पैसा नहीं मिला। विभाग के उप निदेशक डॉ.राजीव रतन ने कहा कि टैबलेट के लिए मिली धनराशि लैप्स न हो और छात्रों को जल्द इसका पैसा मिल सके, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी वजह से इसमें देरी हुई है।