25 जून को मामले में सुजीत को स्पष्टीकरण के लिए पत्र जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उधर, 14 जुलाई को सुजीत के खिलाफ विजिलेंस की खुली जांच भी शुरू हो गई है। बगौली ने अपने आदेश में कहा है कि यह आरोप बेहद गंभीर प्रकृति का है।
उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद उत्तराखंड पेयजल निगम कार्मिक अनुशासन एवं अपील विनियमावली 2017 के विनियम-4 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही कार्यालय महाप्रबंधक प्रशिक्षण, मानव संसाधन प्रकोष्ठ, पेयजल निगम रुड़की कार्यालय में संबद्ध किया गया है।