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पहाड़ का दर्द दिखाया, अब ‘दवा’ दे रहे

Sat, 31 Aug 2013 11:59 AM IST
अमर उजाला, विमल शर्मा, देहरादून
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उत्तराखंड में बीते दिनों आई आपदा के मारों की मदद के लिए फिल्म ‘दाएं या बाएं’ के माध्यम से पहाड़ का दर्द दिखाने वाली फिल्म निर्देशक बेला नेगी आगे आई हैं। नैनीताल में पली-बढ़ी बेला ने अपनी टीम के साथ प्रभावित क्षेत्रों में 23 से 30 अगस्त तक मदद की और भूस्खलन तथा पर्यावरण के संरक्षण के लिए 30 हजार पौधे लगाए।
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बेला नेगी ने देहरादून में बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ सोशल वेबसाइट पर री-बिल्ड उत्तराखंड (उत्तराखंड का पुनर्निर्माण) नाम से एक पेज बनाया। इसके माध्यम से देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंड और सामाजिक सरोकारों से जुडे़ लोगों से संपर्क कर आर्थिक सहयोग एकत्र किया। इसके बाद टीम ने आपदा प्रभावित क्षेत्र मुनस्यारी का दौरा किया। जहां पर टीम ने लोगों को टेंट और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई। इसके अलावा भूस्खलन वाले स्थानों पर पौधे भी रोपने शुरू किए।

पहल लाई रंग
इस टीम की पहल रंग ला रही है। टीम से कपकोट सेवा समिति ने हाथ मिलाया है। जो विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों की मदद कर रहे है। सोशल साइट के माध्यम से अन्य संगठनों ने भी इनसे संपर्क करना शुरू कर दिया है। इस टीम में नारायण सिंह, प्रहलाद सिंह, कैलाश, दुर्गा राम, दिनेश शामिल हैं।
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भूस्खलन रोकने को लगाया रिंगाल
टीम ने पहाड़ में हो रहे भूस्खलन को रोकने केलिए  रिंगाल के पौधे लगाने की योजना बनाई। इसके पहले चरण में टीम ने 23  अगस्त से तीस अगस्त कर तीन जिलों चमोली के सुनाली, कडाक, पिथौरागढ़ के मुनस्यारी और बागेश्वर के सुलिंग में लगभग में तीस हजार पौधे लगाए है। निदेशक बेला नेगी ने बताया कि पहाड़ में रिंगाल (बेम्बू) के पचास हजार पौधे और लगाने की योजना है।  उन्होंने स्थानीय लोगों से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है।

चक दे इंडिया फेम भी मदद को बढ़ी आगे
चक दे इंडिया फेम और बिहार निवासी शिल्पा शुक्ला इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि आपदा की भयानक तस्वीर देखने के बाद उनके मन में  हाथ बढ़ाने का ख्याल आया। इसके अलावा इस टीम में एयर इंडिया में कार्यरत और सामाजिक कार्यकर्ता नीमा थापा इनका सहयोग कर रही हैं। शिल्पा और नीमा का कहना है कि आपदा के बाद जो कार्य पहाड़ों में होना था अभी तक ठीक तरीके से नहीं हो पाया है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में बहुत कार्य करने की जरूरत है।
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