इस दौरान ऑल वेदर रोड परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा है। अतिवृष्टि से यहां करीब 200 लैंडस्लाइड जोन सक्रिय हैं। इनमें से फिलहाल 155 को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, इनमें से 89 भूस्खलन क्षेत्रों के उपचार के लिए केंद्र सरकार की ओर से 971.68 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया गया है।
मानसून के बाद उपचार का काम शुरू हो जाएगा। वहीं, प्रदेशभर में कुल सक्रिय भूस्खलन क्षेत्रों की संख्या 360 के आसपास रही। पहाड़ी से गिरे भारी मलबे और गदेरों में आई सिल्ट ने सड़कों को भारी नुकसान पहुंचाया। वहीं कई जगह सड़क धंस गई।
बारिश के कारण सड़कों और पुलों को भारी क्षति हुई है। पहली बार प्रतिदिन की रिपोर्ट अपडेट की जा रही है। प्राथमिकता सड़कों को खोलने की है। सड़कों और पुलों को पूर्ववत स्थिति में लाने के लिए भी काम शुरू कर दिया गया है। कुल कितनी क्षति हुई है इसका प्रारंभिक आकलन कर लिया गया है। मानसून के बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी। - डॉ. पंकज पांडेय, सचिव, लोनिवि
प्रदेश में 360 से अधिक डेंजर स्लिप जोन चिह्नित
अल्मोड़ा-95, बागेश्वर-14, नैनीताल-15, पिथौरागढ़-चार, चंपावत-तीन, उत्तरकाशी-सात, चमोली-27, रुद्रप्रयाग-33, टिहरी-96, देहरादून-14, पौड़ी-22, हरिद्वार-तीन।
(आंकड़े लोनिवि के अनुसार)