उत्तराखंड के नए डीजीपी बीएस सिद्धू का कहना है कि वह पुलिस को न्यूट्रल गेयर से बाहर लाएंगे। इसमें वह कितना कामयाब होंगे यह तो समय ही बताएगा लेकिन कुछ केस हैं जो यह बताते हैं कि पुलिस की चाल कितनी सुस्त है। उसे तीसरे और चौथे गेर में चलाने की जरूरत है। बिना एक्सीडेंट किए डीजीपी साहब इसे कैसे चलाते हैं यह देखने वाली बात होगी।
वीवीआईपी गोलीकांड : नहीं बढ़ी जांच
17 सितंबर को विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या पर कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने अपने आवास पर पार्टी नेताओं के लिए भोज का आयोजन किया था। इसमें मंत्री से लेकर विधायक और छोटे नेता भी शामिल थे। इस वीवीआईपी पार्टी में पार्टी के खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन ने फायरिंग कर दी। इसमें दो लोग घायल हो गए थे, जिसमें से एक विवेकानंद खंडूडी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। कई दिनों तक चैंपियन फायरिंग करने से इनकार करते रहे लेकिन सत्र के अंतिम दिन जब विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने चैंपियन के नाम का खुलासा कर दिया तो उसी दिन उन्होंने गढ़ी कैंट थाने में सरेंडर करके वहीं से जमानत भी ले ली। तब से पुलिस उनके आगे-पीछे घूम रही है। न तो उनका हथियार जब्त कर पाई है न ही कार्रवाई आगे बढ़ा पाई है।
मुन्नाभाई मामला : पुलिस के हाथ खाली
सितंबर माह में ही यूएपीएमटी की परीक्षा में 16 मुन्नाभाई पकड़े गए। इस मामले में भी पुलिस आगे नहीं बढ़ पाई है। सरगना की तलाश के नाम पर पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं, लेकिन एक भी बड़ी मछली पुलिस के हाथ नहीं लगी है। यह हाल तब है जबकि मामले की शिकायत की गई थी और यह भी बताया गया है कि मामले में प्रदेश के ही कई लोग जुड़े हैं।
गैंगरेप प्रकरण : तीन अज्ञात नहीं हुए ज्ञात
यह मामला तो है वर्ष 2008 का। उस उस समय सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर एक छात्रा से गैंगरेप किया गया था। मामले में पिछले दिनों भाजपा के दो नेताओं को सजा मिल गई लेकिन तीन अज्ञात लोग अब भी ज्ञात नहीं हो पाए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि तीनों आरोपियों में दो भाजपा के बड़े नेता और एक आईएएस अधिकारी शामिल हैं इसलिए पुलिस अपनी जांच को आगे नहीं बढ़ा रही है। एसएसपी का कहना है कि मामले में शिकायत मिलने पर वह कार्रवाई करेंगे जबकि कानून के जानकारों का मानना है कि मामले में नई शिकायत की जरूरत ही नहीं है। पुलिस पुरानी शिकायत पर ही जांच को आगे बढ़ा सकती है।
राजेश शर्मा हत्याकांड : नहीं सुलझी गुत्थी
सात सितंबर को पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र के सेवलाकलां में हुए पूर्व जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. जेपी शर्मा की पत्नी राजेश शर्मा की हत्या करने वाले अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। शुरूआत में हत्यारों के करीब पहुंचने का दावा कर रही पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।
नीरू हत्याकांड : दो कदम भी नहीं बढ़े
दस सितंबर को पॉश एरिया तेगबहादुर रोड स्थित घर में ठेकेदार की पत्नी नीरू सैनी की हत्यारों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस अभी तक हत्यारे तो दूर कत्ल की वजह तक नहीं तलाश पाई है। पुलिस किसी करीबी का हाथ होने की बात तो कहती हैं लेकिन उस तक पहुंच नहीं पा रही है।
अंशु हत्याकांड : बन गया रहस्य
वर्ष 2009 में डीएवी की छात्रा अंशु नौटियाल की हत्या करने वालों के बारे में भी पुलिस अभी तक तस्वीर साफ नहीं कर पाई है। जिस युवक को हत्यारा बताकर पुलिस ने गिरफ्तार किया था वह निचली अदालत से बरी हो चुका है। मामला हाईकोर्ट में है। लेकिन पुलिस जांच एक रहस्य बनकर रह गई है।
एसएससी परीक्षा में नकल
रविवार को एसएससी की परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल करते दो युवतियों सहित छह लोग पकड़े गए हैं। यह मामला एकदम ताजा है। लेकिन पुलिस के लिए यह भी चुनौती बन गया है। मामले में दूसरे राज्यों के लोग जुड़े हैं। इस वजह से इस नकल गिरोह के सरगना तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं होगा।