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उत्तराखंडः नई कार्यकारिणी में संतुलन बनाने के चक्कर में कांग्रेस को न माया मिली न राम

Tue, 28 Jan 2020 04:10 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • जंबो कमेटी में धड़ों को साधने की चुनौती अब और ज्यादा होगी प्रीतम के सामने
  • प्रदेश अध्यक्ष को बड़ी कमेटी के झगड़ों से भी होगा निपटना 
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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नई कमेटी में संतुलन साधने की कोशिश में कांग्रेस को न माया मिल पाई और न ही उन्हें राम मिल पाए। जंबो कमेटी में अलग-अलग धड़ों को साधने की चुनौती अब भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के सामने रहेगी। वहीं, जिन झगड़ों से वह बचना चाह रहे थे, उन्हीं झगड़ों से अब उन्हें निपटना होगा। 

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कांग्रेस इस समय 2022 में सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। इस दावे को पुख्ता आधार देने के लिए प्रीतम सिंह ने नई कमेटी को मैदान में उतारने का फैसला किया था। कमेटी के जारी होते ही कांग्रेस में असंतोष का राग भी अलापा जा रहा है। विधायक धामी तो प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे चुके है। खुद प्रीतम सिंह हाईकमान को सौंपी गई सूची में छेड़छाड़ की आशंका जता कर यह संकेत कर गए कि कांग्रेस में धड़ेबंदी किस स्तर तक है। इस धड़ेबंदी से बचने के लिए ही प्रीतम की कमेटी 150 तक जा पहुंची। इस पर भी बात नहीं बनी तो विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची करीब 90 हो गई।

जाहिर है कि जंबो कार्यकारिणी को संभालने में अब प्रीतम को खासी मशक्कत करनी होगी। करीब 30 महामंत्री और इतने ही उपाध्यक्षों से काम लेना प्रीतम के लिए आसान नहीं होगा। साफ है कि आगे आने वाले समय में प्रीतम को कमेटी के अंदर के झगड़ों से भी निपटना होगा। विशेष आमंत्रित सदस्यों सहित करीब 250 लोगों की इस कमेटी के पदाधिकारी अपने आकाओं को संतुष्ट करने को भी तवज्जो दे सकते हैं। 
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एक भाजपाई, 12 कांग्रेसियों के बराबर

भाजपा में एक संगठन महामंत्री समेत चार महामंत्री हैं। छह उपाध्यक्ष और आठ मंत्री हैं। कुल मिलाकर प्रदेश कार्यकारिणी प्रवक्ताओं समेत 29 लोगों की है। कांग्रेस ने अभी अपने प्रवक्ता घोषित ही नहीं किए हैं। इसके बावजूद संगठन 250 पदाधिकारियों का है। 
 
उत्तर प्रदेश में 51 की है कमेटी

उत्तराखंड से कहीं अधिक बड़े उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कमेटी मात्र 51 लोगों की है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप से यह हुआ। इसके उलट, उत्तराखंड में प्रीतम सिंह को नई कमेटी के लिए ढाई साल का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद भी कमेटी छोटी नहीं रह पाई। उत्तराखंड से एक दिन पहले जारी हुई केरल की कांग्रेस कमेटी में भी मात्र 47 पदाधिकारी है। 
 
विवादित नेता भी हुए कमेटी में शामिल

कांग्रेस की नई कमेटी में एक विवादित नेता को प्रदेश महामंत्री बना देने पर सवाल उठाया जा रहा है। इस कांग्रेस नेता को सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण के लिए दो साल की सजा सुनाई गई थी। इसी तरह कांग्रेस के एक नेता का पिछले दिनों वीडियो जातिगत टिप्पणी के कारण सोशल मीडिया पर छाया था। इस नेता को कमेटी में उपाध्यक्ष बनाया गया है।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी नाराज

अंदरखाने कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची में कई नए नामों को शामिल करने से भी नाराज हैं। इनका कहना है कि इससे विशेष आमंत्रित सदस्यों की गरिमा भी कम हुई है। 
 
जब भी संगठन बनता है तो कुछ नाराजगी सामने आती ही है। जहां तक कांग्रेस कमेटी का आकार छोटा रखने का सवाल है। इतनी बड़ी कमेटी बनने के बाद भी नाराजगी है तो समझ सकते हैं कि कमेटी छोटी होती तो क्या होता। - प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

यह कमेटी किन परिस्थितियों में बनी यह तो प्रदेश प्रभारी ही बता पाएंगे। लगता है उन्होंने हर वर्ग के लोगों को स्थान देने का प्रयास किया। कमेटी छोटी होती तो अधिक कारगर साबित होती। - योगेंद्र खंडूड़ी, विशेष आमंत्रित सदस्य 

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