कांग्रेस के 15 विधायकों ने फिर सरकार के खिलाफ अपनी ताकत दिखाई है। पीडीएफ विधायक के आरचण से संबंधित मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र की प्रति शनिवार को प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी तक पहुंचाई गई। हालांकि इस संबंध में कोई भी विधायक बोलने को तैयार नहीं है। पत्र में बहुगुणा समर्थकों के अलावा कुछ अन्य विधायकों के भी हस्ताक्षर हैं।
मीडिया के हाथ लगी पत्र की प्रति में पीडीएफ के बसपा विधायक सरवत करीम अंसारी के खिलाफ मीडिया में आए स्टिंग ऑपरेशन की चर्चा की गई है। इस स्टिंग में अंसारी को रिश्वत लेते दिखाया गया था और इस प्रकरण की जांच विधानसभा की कमेटी कर रही है।
पत्र में इसी का हवाला देते हुए लिखा है कि इससे कांग्रेस की छवि धूमिल हो रही है, इसकी रक्षा करें। पत्र में जिन विधायकों के नाम से हस्ताक्षर हैं, उनमें बहुगुणा समर्थकों के अलावा कुछ नए नाम भी हैं। बताते हैं कि हीरा सिंह बिष्ट ने यह पत्र अंबिका सोनी तक पहुंचाया है।
अंबिका सोनी ने हरीश के पाले में डाली गेंद
वहीं हीरा सिंह का कहना है कि वो पीडीएफ के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पीडीएफ पर मंथन तो करना ही पड़ेगा। पत्र में जिन विधायकों के नाम से हस्ताक्षर हैं, वे न तो यह कह रहे हैं कि हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और न ही खुलकर कुछ बोलने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री खेमे की मानी जाने वालीं कुमाऊं की एक विधायक कहती हैं कि उन्हें कुछ याद ही नहीं आ रहा है।
इन विधायकों के हैं नाम
हीरा सिंह बिष्ट, सुबोध उनियाल, मदन बिष्ट, विजय पाल सजवाण, अनुसूया प्रसाद मैखुरी, प्रणव सिंह चैंपियन, सुंदर लाल मंद्रवाल, उमेश शर्मा, रेखा आर्य, शैलेंद्र मोहन सिंघल, जीतराम, विक्रम नेगी, सरिता आर्य, नवप्रभात और राजकुमार।
विचार विमर्श करेंगे, बुनियादी उसूल होते हैं क्या चुनौती है और परिस्थितियां क्या हैं। पीडीएफ ने सुख दुख में साथ दिया है। ये दायित्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का है कि आपस में तय करें और स्थिर सरकार चले।
-अंबिका सोनी, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी