हार के ये भी रहे कारण
-दो साल से नहीं हुआ संगठन का विस्तार : लोकसभा चुनाव में बूथ स्तर पर पार्टी कमजोर रही। इसकी एक वजह दो साल से संगठनात्मक ढांचे का विस्तार नहीं हुआ। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से हाईकमान को भेजी नामों की सूची पर अभी तक मुहर नहीं लग पाई। चुनाव लड़ने के लिए बूथ व ब्लाक स्तर पर टीम नहीं थी।
-विधायक भी अपने क्षेत्रों में नहीं दिला पाए बढ़त : मंगलौर व बदरीनाथ उपचुनाव में जीते कांग्रेस प्रत्याशियों को छोड़कर लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस के 18 विधायक थे, लेकिन सिर्फ पांच विधायकों के क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशियों को बढ़त मिली, जबकि 13 विधायकों के क्षेत्र में कांग्रेस पीछे रही।
-पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी : लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में एकजुटता नहीं दिख। अंदरूनी गुटबाजी के कारण वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार में दमखम नहीं दिखाया। प्रत्याशी अकेले ही अपने क्षेत्रों में प्रचार में जुटे रहे।
ये भी पढ़ें...फिर शुरू हुई अदावत: एक रावत की पार्टी में दूसरे रावत...तीसरे रावत नाराज, जानें क्यों सुर्खियों में आम की दावत
सांप निकल गया रस्सी पीटने से कोई फायदा
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कमेटी के समक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि सांप निकल गया अब रस्सी पीटने से कोई फायदा नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा व पार्टी नेताओं के प्रयासों से चुनाव में कांग्रेस का वोट बैंक बढ़ा है।