अल्मोड़ा व नैनीताल सीट में ये रहे हार मुख्य कारण
वरिष्ठ नेताओं का चुनाव लड़ने से मोहभंग
वरिष्ठ नेताओं से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। पार्टी ने ऐसे चेहरों पर दांव लगाया जो लगातार चुनाव हारे। प्रत्याशियों का चयन सही नहीं किया गया। दिग्गजों के चुनाव लड़ने से मना करने से पार्टी के प्रति अच्छा माहौल नहीं बना। जो हार का मुख्य कारण रहा।
जनता की नब्ज नहीं पकड़ पाए
मंगलौर व बदरीनाथ उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए। लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जनता की नब्ज नहीं पकड़ पाई। यदि कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ती तो परिवर्तन दिखा सकती थी। कुछ सीटों पर कांग्रेस चुनाव में टक्कर देती दिखाई दी थी।
मनोबल गिरने से कार्यकर्ताओं में नहीं दिखा उत्साह
चुनाव में पार्टी नेताओं की आपसी खींचतान के साथ प्रत्याशियों का चयन सही न होने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा। जिससे कार्यकर्ता में चुनाव को लेकर जोश नहीं दिखा। केंद्रीय नेताओं ने प्रचार के लिए दूरी बनाए रखी। पूर्व सीएम हरीश रावत की कुमाऊं की राजनीति में अच्छी पकड़ी है। लेकिन बेटे के प्रचार के लिए हरिद्वार सीट से बाहर नहीं निकले।
पार्टी नेताओं में आपसी खींचतान
लोकसभा चुनाव में पार्टी नेताओं में आपसी खींचतान भी सामने आई। भाजपा का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस में एकजुट की कमी रही। उपचुनाव को एकजुटता से लड़ा तो पार्टी की जीत का परचम लहराया।
चुनाव लड़ने के लिए संसाधनों का अभाव
भाजपा की तुलना में कांग्रेस को चुनाव लड़ने के लिए संसाधनों की कमी से जूझना पड़ा। प्रचार प्रचार के लिए पार्टी के पास फंड कमी रही।
नहीं पहुंची रजनी पाटिल
फैक्ट फाइडिंग कमेटी की सदस्य सांसद रजनी पाटिल उत्तराखंड नहीं पहुंच पाई है। महाराष्ट्र में आवश्यक बैठक होने से पार्टी हाईकमान की ओर से उन्हें बैठक शामिल होने के लिए भेजा। पाटिल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वे पांच दिन बाद उत्तराखंड आएंगी और लोकसभा चुनाव ने नतीजों को लेकर पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगी।