कोविड-19 के चलते आरटीओ/ एआरटीओ कार्यालयों में कामकाज बंद है। ऐसे में वाहन सरेंडर करने को लेकर भी समस्या आ रही है। उप परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन वाहन सरेंडर करने के संबंध में एनआईसी से अनुरोध किया गया है। विभाग के वाहन-4 सॉफ्टवेयर में इस संबंध में आवश्यक बदलाव करने की योजना है।
साथ ही वाहन स्वामी को विशेष परिस्थिति के मद्देनजर वाहन से जुड़े कागजात कार्यालय में जमा करने से कुछ समय के लिए छूट मिल सके, इसके लिए शासन से अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। सुविधा मिलने पर ऑनलाइन ही सरेंडर फीस भी जमा हो सकेगी।
प्रदेश में परिवहन कार्यालयों में करीब डेढ़ लाख कॉमर्शियल वाहन पंजीकृत हैं। इसमें डंपर, ट्रक, बस टैक्सी समेत अन्य वाहन शामिल हैं। एक अनुमान के मुताबिक बरसात के समय जब खनन आदि कार्य बंद हो जाते हैं तो करीब पच्चीस से तीस हजार वाहन सरेंडर होते हैं।
खनन में लगे हजारों वाहन
कुमाऊं में गौला, कोसी, शारदा, दाबका नंधौर आदि नदियों में खनन होता है इसके अलावा निजी पट्टों में भी खनन किया जाता है। इसमें बड़ी संख्या में डंपर, ट्रैक्टर आदि लगते हैं। सामान्य तौर पर खनन बंद होने के बाद वाहन स्वामी अपने वाहन को परिवहन विभाग में सरेंडर कर देते हैं।