उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी का स्थान और दिशा परिवर्तन भी हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्रियों रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूरी और विजय बहुगुणा ने जिस जगह बैठकर सरकार चलाई, शायद उसमें वास्तु व दिशा दोष समझ में आ रहा था।
नए मुख्यमंत्री की दिशा उत्तराभिमुख यानी उत्तर की तरफ उनका मुंह होगा। शुभ मुहूर्त को देखते हुए ही शाम को विधानसभा गए थे।
उत्तराखंड की राजनीति में अपशकुन और वास्तु के भी मायने मतलब हैं। अल्प कार्यकाल में ही चलते बने तीन मुख्य मंत्रियों को लेकर भी वास्तु का फंडा बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धर्म-कर्म पर करते हैं विश्वास
कहने वालों की मानें तो प्रदेश में पांच साल पूरे करने वाले मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी इसलिए जमे रहे क्योंकि वह सचिवालय की दूसरी बिल्डिंग में बैठते थे जहां वर्तमान में मुख्य सचिव बैठ हैं। नए मुख्यमंत्री धर्म-कर्म पर विश्वास करते हैं।
बताते हैं उनकी ख्वाहिश पहले बसंत पंचमी (चार फरवरी) केदिन शपथ ग्रहण की थी लेकिन जिस तरह का राजनीतिक कोहराम मचा था उसे शांत करने के लिए आलाकमान ने पहली को ही शपथ ग्रहण करा दी।
मुख्यमंत्री कक्ष का ले आउट बदला
पहली को पद और गोपनीयता की शपथ लेने के तीन दिन बाद मुख्यमंत्री ने विधिवत अपने कक्ष में बैठकर कामकाज किया। मुख्य कक्ष के बगल में आराम कक्ष में बाकयदा पूजा पाठ हुआ। जिसमें उनकी पत्नी और बेटी भी शामिल हुईं।
सचिवालय स्थित चतुर्थ तल पर बने मुख्यमंत्री कक्ष का ले आउट बदल गया है। वास्तु के साथ चतुर्थ तल का तौर तरीका भी बदला है। अभी तक मुख्यमंत्री कक्ष को जाने वाले गैलरी में जाने पर लंबी पूछताछ होती थी लेकिन अब सभी आम खास के लिए उसे खोल दिया गया है। हां सुरक्षा की दृष्टि से अभी पुलिस कर्मी तैनात हैं।
बांटे गए दायित्वों का मांगा जा रहा हिसाब
मुख्यमंत्री हरीश रावत भले ही पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की ओर से चलते-चलते बांटे गए दायित्वों को न बदलने की बात कह रहे हों, लेकिन मंगलवार को ही बांटे गए दायित्वों का हिसाब मांगा गया।
दायित्वधारियों की सूची भेजने का निर्देश
सुबह मीडिया को मुख्यमंत्री ने बयान दिया और दोपहर को मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश भेजकर तत्काल दायित्वधारियों की सूची भेजने का निर्देश दिया। खास बात ये है कि मुख्य सचिव ने ही 28 जनवरी को विभागों को आदेश दिए गए थे कि आज ही सभी दायित्वधारियों के नाम तय कर अधिसूचना जारी करें।
गौरतलब है कि बहुगुणा सरकार में दायित्व बांटने का काम 13 जनवरी से शुरू हुआ था। 28 को इसमें तेजी आई और 30 तक आते-आते करीब डेढ़ दर्जन लोगों को विभागों और आयोगों में एडजस्ट कर दिया गया।
हाल ये रहा कि 31 जनवरी को मुख्यमंत्री बहुगुणा जिस समय इस्तीफा देने जा रहे थे उसके कुछ पहले तक लोगों को खुश करते रहे।
31 जनवरी को करीब 21 दायित्वधारियों से संबंधित अधिसूचना जारी हुईं हैं। इसमें कुछ अवैतनिक पद भी शामिल हैं। दायित्वधारियों में कुछ ने अगले ही दिन कुर्सी भी संभाल ली और उनके विभाग ने सूचना शासन को भेज दी थी।
सीएम के काफिले में प्राइवेट वाहनों की संख्या बड़ी
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भले ही अपनी फ्लीट में वाहनों की संख्या कम कर दी हो लेकिन उनके काफिले में प्राईवेट वाहनों की संख्या बढ़ गई है। और, जब सीएम सचिवालय से कूच करते है तो मुख्यमंत्री के लिए नियत गेट से ही नेताओं की गाड़िया भी आ जा रही है।
सुरक्षाकर्मी हलकान
इसे लेकर सुरक्षाकर्मी भी हलकान है। सीएम ने अपने काफिले में एक पायलट कार व दो इनोवा गाड़ी रखी है। लेकिन जब काफिला चलता है तो कुछ कांग्रेसी नेताओं के वाहन उनके पीछे पीछे रहते है। सचिवालय में आने जाने के लिए मुख्यमंत्री के लिए अलग से गेट है।
और, नेताओं के वाहन भी फ्लीट में शामिल होकर उसी गेट से निकल रहे हैं। इससे सीएम की सुरक्षा के साथ ही दुर्घटना की आशंका भी बनी है। क्योंकि नेताओं की ये गाड़िया भी फ्लीट के साथ रफ्तार से दौड़ती है।
रावत के सीएम बनने से जगी उम्मीदें
हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने से मसूरी के लोगों ने अपनी उम्मीद पूरी होने की आशा जताई। पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल और उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह पंवार ने कहा कि पहली बार कांग्रेस ने उत्तराखंड का सीएम ऐसे नेता को दिया, जो पहाड़ की जमीनी हकीकत से वाकिफ है।
विकास की किरण जगी
उन्होंने कहा कि हरीश के नेतृत्व में राज्य में विकास की किरण जग गई है। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल और उत्तराखंड बेरोजगार मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी भगवान सिंह पंवार ने कहा कि हरीश के नेतृत्व में पहाड़ का अपेक्षित विकास होगा।
उन्होंने कांग्रेस हाईकमान का आभार जताया। कहा आपदा पीड़ित राज्य को ऐसे मुख्यमंत्री की लंबे समय से दरकार थी।