मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और राज्यपाल कृष्ण कांत पाल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के जनता मिलन हॉल में ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्चच्छता के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल ने कुमाऊ एवं गढ़वाल मंडल के लिए स्वच्छता रथ को रवाना किया। उन्होंने स्वच्छता का संकल्प लेकर पोस्टर पर हस्ताक्षर किए।
इस मौके पर राजयपाल डा पॉल ने कहा कि हमें स्वच्छता को अपनी आदत बनाना होगा। सफाई करनी ही नहीं है बल्कि इसे बनाए भी रखना भी है। यह लगातार चलने वाला अभियान है। इस मौके पर दो अक्तूबर 2014 तक संपूर्ण भारत को स्वच्छ बनाने की शपथ ली गई।
राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम को ऊर्जा देने की आवश्यकता है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय ने स्वच्छता के मामले में देश के सभी विश्वविद्यालयों में से प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अन्य संस्थाओं, स्कूलों को भी इससे प्रेरित होकर इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा।
इस स्वच्छता पखवाड़े में 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर सेवा दिवस, 25 सितम्बर को पं. दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी के अवसर पर सर्वत्र स्वच्छता दिवस एवं दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन एवं नए भारत के लक्ष्य को गम्भीरता से लेना होगा। मोहल्लों एवं गांवों से एम्बेस्डर बनकर इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ग्रामीण क्षेत्रों में शौच से मुक्त (ओ.डी.एफ) होने वाला देश का चौथा राज्य है।
मार्च-2018 तक राज्य के शहरी क्षेत्र को भी पूर्ण रूप से ओ.डी.एफ करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को बढ़ाने के लिए सबका योगदान जरूरी है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत, सतपाल महाराज, राज्य मंत्री रेखा आर्य, विधायक हरबंश कपूर, विधायक मुन्ना सिंह चौहान मुख्य सचिव एस. रामास्वामी आदि उपस्थित रहे।