तेज बहाव से बचाई बालिका की जान
चंपावत की माया को नदी के तेज बहाव में फंसी एक बालिका की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। 5 अगस्त 2025 को भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इस दौरान एक बालिका तेज धारा में बहने लगी। माया ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने का प्रयास किया और सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना में माया खुद भी घायल हो गई थीं।
बादल फटने के दौरान 17 लोगों को किया सतर्क
देहरादून की आराध्या ने 2 जून 2026 को बादल फटने की घटना के दौरान सूझबूझ का परिचय दिया। भारी बारिश के कारण अचानक मलबा और पानी आने लगा। खतरे को भांपते हुए आराध्या ने घर में मौजूद सभी 17 लोगों को तत्काल सतर्क किया, जिससे वे सुरक्षित स्थान पर पहुंच सके। उन्होंने तीन वर्षीय बच्ची को भी पानी के तेज बहाव से बचाया।
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बुजुर्ग को वाहन की चपेट में आने से बचाया
टिहरी गढ़वाल की श्वेता को एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। 30 जनवरी 2025 को एक बुजुर्ग सड़क पर लाठी के सहारे चल रहे थे। इसी दौरान सामने से तेज रफ्तार में वाहन आ रहा था। श्वेता ने तत्परता दिखाते हुए बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क किनारे सुरक्षित कर दिया। मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार का उद्देश्य असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय देने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से बच्चों के साहसिक कार्यों को पहचान देने के साथ ही अन्य बच्चों को भी कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दिखाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।