मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके कई मंत्रियों के साथ-साथ हाइकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी अपनी गाड़ियों से लालबत्ती हटवा दी है। देश में वीआईपी कल्चर समाप्त करने के लिए मोदी सरकार की ओर से उठाए गए कदम के साथ प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा भी खड़े दिखे। लालबत्ती हटाने के इस फैसले की हाइकोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी सराहना की है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने वाहन पर लालबत्ती का प्रयोग करना बंद कर दिया है। देश में वीआईपी कल्चर समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदम के साथ प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा भी खड़े दिखे। मुख्यमंत्री के काफिले में तीन मंत्री शामिल थे, लेकिन किसी की भी गाड़ी में लालबत्ती नहीं दिखी।
मुख्यमंत्री अंबेसडर कार (यूके 07जीए-0787) में सवार होकर यहां कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री के काफिले में तीन मंत्रियों की कार शामिल थी, लेकिन किसी की भी कार में लालबत्ती नहीं लगी थी। आजादी के बाद यह पहला मौका होगा, जब मुख्यमंत्री और मंत्रियों की कार में लालबत्ती नहीं लगी थी। इस संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना था कि देश में वीआईपी कल्चर समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहल की है।
भारत सरकार के निर्णय का अनुसरण करते हुए मैंने (मुख्यमंत्री) लालबत्ती छोड़ दी है। मंत्रिगण भी लालबत्ती छोड़ेंगे। बता दें कि बुधवार को वन मंत्री हरक सिंह रावत, परिवहन मंत्री यशपाल आर्य और धन सिंह रावत ने भी लालबत्ती उतार दी थी। वहीं, लोग इसे भारत सरकार की अच्छी पहल बता रहे थे। कई लोगों की राय थी कि अधिकारियों के वाहनों को भी बत्ती रहित किया जाना चाहिए। सरकार और अधिकारियों का दायित्व जनता की सेवा करना है।