युवा प्रदेश, युवा मुख्यमंत्री के फार्मूले पर चलते हुए 261 दिन बाद भाजपा ने फिर पुष्कर सिंह धामी के नाम पर ही हामी भरी। पूर्व की सरकार के इतने कम कार्यकाल में धामी ने धुआंधार बैटिंग करते हुए कई अहम फैसले लिए थे। तब रूठों को मनाने की चुनौती थी तो कर्मचारियों और समाज के दूसरे असंतुष्ट वर्ग को साधने की भी मुश्किल राह। सभी से पार पाते हुए उनके नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव लड़ा और 47 सीटों के भारी बहुमत के साथ सत्ता में दोबारा आने का मौका मिला।
पिछले साल तीन जुलाई को जब भाजपा प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी तो तमाम तरह की कयासबाजी थी। तमाम दावेदारों के नाम चर्चा में चल रहे थे। दो सीएम बदलने से कार्यकर्ताओं में मायूूसी भी थी। एक अदने से दावेदार माने जा रहे पुष्कर सिंह धामी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित हुआ तो जैसे एक अलग ऊर्जा का संचार होता चला गया।
भाजपा को भी एक उम्मीद की किरण मिलती गई। पांच जुलाई को मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के सप्ताह भर के भीतर धामी ने मुख्य सचिव ओम प्रकाश को हटाकर नौकरशाही में एक संदेश भी दे दिया। इसके बाद उन्होंने जहां कर्मचारियों के लिए तमाम घोषणाएं की तो कई योजनाओं को लेकर दिन-रात एक कर दिया। आज धामी उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
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बताते हैं कि समय कम और जिम्मेदारी ज्यादा होने के चलते पुष्कर सिंह धामी ने काम करने में कोई कोताही नहीं बरती। विधानसभा चुनाव के दौरान भी एक दिन में कई-कई विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचकर रैलियां कीं। पूरी जान लगाकर चुनाव लड़े और आखिरकार भाजपा के खाते में दोबारा प्रचंड बहुमत की जीत आई। हालांकि, इस मारामारी में धामी अपनी खटीमा सीट से चुनाव हार गए। इसके बाद से तमाम तरह की कयासबाजियां चल रहीं थीं लेकिन धामी कहीं भी दावेदारों की सूची के पहले नंबर से नहीं हट पाए। आखिरकार पार्टी ने 261 दिन के बाद दोबारा धामी के नाम पर ही हामी भर दी।
पिछली सरकार में धामी ने यह लिए थे प्रमुख फैसले
- प्रदेश में चुनाव से पहले 20 हजार से ज्यादा खाली पदों पर भर्तियां निकाली जाएंगी। ज्यादातर पर निकल भी गई।
- सभी भर्तियों में 31 मार्च तक किसी भी तरह का आवेदन शुल्क किसी भी उम्मीदवार से नहीं लिया जाएगा।
- कर्मचारियों की वेतन, पेंशन आदि से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए वेतन विसंगति समिति का गठन किया गया।
- सबसे चर्चित और विवादित चारधाम देवस्थानम बोर्ड को समिति बनाकर उसकी रिपोर्ट के आधार पर खत्म किया।
- तीसरे गैरसैंण मंडल को लेकर हर तरह की चर्चाओं पर विराम लगा दिया।
- सभी सरकारी अस्पतालों में 260 से ज्यादा जांचों को निशुल्क कर दिया।