मुख्यमंत्री हरीश रावत ही नहीं प्रदेश के तीन मंत्री ऐसे हैं जिन्होंने आधा साल बीतने के बाद भी विधायक निधि का एक भी प्रस्ताव नहीं भेजा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत का तो साफ कहना है कि अभी समय है।
प्रदेश में विधायक निधि दो करोड़ की है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधायकों को निधि के तहत अधिक से अधिक प्रस्ताव जल्द बनाने को भी कहा था। दूसरी तरफ, हर बार सदन में विधायकों की ओर से विधायक निधि को बढ़ाने की मांग भी होती रही है।
दो करोड़ रुपए भी इन्हें कम लगते हैं। इनका कहना होता है कि क्षेत्र में लोगों की मांग विधायक निधि के प्रस्तावों को लेकर भी होती है। हद तो यह है कि खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत की विधायक निधि से अभी तक एक भी प्रस्ताव नहीं है। पूछे जाने पर मुख्यमंत्री का कहना था कि अभी समय है।
पिछले वित्तीय वर्ष में उनकी विधायक निधि का पूरा उपयोग हुआ। इस खर्च का ब्यौरा भी लिया जा सकता है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के साथ ही प्रदेश के तीन मंत्री और हैं जिनकी विधायक निधि का अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं है।
इनमें प्रदेश में नंबर टू मानी जा रहीं वित्त मंत्री इंदिरा हृद्येश भी शामिल हैं। गृह मंत्री प्रीतम सिंह का भी नवंबर माह के अंत तक एक भी प्रस्ताव नही है। यही हाल शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का भी है।