सामने विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, एक तरफ सत्ता पक्ष, दूसरी तरफ विपक्ष। जमीनी हकीकत बया करते मुद्दे और पूरे तथ्य व आंकड़ों के साथ उन्हें उठा रहे विधायक। हंगामे और शोर-शराबे से इतर यह नजारा था देहरादून में आयोजित बाल विधानसभा का।
इसे देखकर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल भी खासा प्रभावित हुए और अपने विधायकों को नसीहत दी कि वह बाल विधायकों से सीख लें और जब सदन में पहुंचे इसी तरह तथ्य और आंकड़ों के साथ जनहित के मुद्दे उठाएं। रविवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित बाल विधानसभा के तीसरे सत्र का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल ने किया।
इस अवसर पर कुंजवाल ने कहा कि बाल विधायकों ने जो बात अपनी विधानसभा में रखी वह समाज के बीच जाकर देखी और महसूस की है। यह काम हमारे राज्य के विधायकों को करना चाहिए था। तीन घंटे चले बाल विधानसभा सत्र को देखने के बाद उन्होंने कहा कि बाल विधायकों ने जो विचार हमारे प्रदेश के तरक्की के लिए रखे हैं सरकार उसका संज्ञान लेगी।
बाल विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों को बाल मुख्यमंत्री अदिति शर्मा ने स्वीकार किया और विश्वास दिलाया कि सुझाव व समाधान की जो अपेक्षा उनसे की गई है वह उस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगी। आयोजक संस्था श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सचिव ज्ञान सिंह रावत ने बाल प्रतिनिधियों को पर्यावरण और विकास पर गहरी नजर रखने को कहा।
आश्रम के संचालनकर्ता गजेंद्र नौटियाल ने कहा कि बच्चे अपने स्तर पर प्रयास कर सरकार को आइना दिखा रहे हैं। प्लान इंडिया के राज्य प्रबंधक सुरेश बलोदी ने राज्य सरकार से बाल विधान सभा जैसे नवाचारी प्रयासों को आर्थिक सहयोग करने की मांग की।
बच्चों ने स्कूलों की जो हालत बताई है वह राज्य की हकीकत है। अभी से जो पहल की गई है उसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है। बाल अधिकारों को स्कूली पाठ्यक्रम में डाला जाना चाहिए। यह जरूरी भी है। बच्चों ने सिखा दिया कि सदन कैसे चलता है।
- गोविंद कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष