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उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच जेपी नड्डा से मिले सीएम त्रिवेंद्र, करीब 50 मिनट तक चली बैठक

Mon, 08 Mar 2021 10:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

भाजपा का पर्यवेक्षक बनाकर उत्तराखंड भेजे गए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह व भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के दिल्ली रवाना होने के साथ भाजपा के भीतर सन्नाटा पसर गया है।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : ANI
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विस्तार
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उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से देर रात मुलाकात की। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री मंगलवार को प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं। दोनों शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री देहरादून लौटेंगे। नड्डा से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने सारे सियासी घटनाक्रम के बारे में चर्चा की। यह बैठक 50 मिनट से अधिक चली। 

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सांसद बलूनी से दिल्ली में मिले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र
दिल्ली प्रवास के दौरान सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्यसभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी से उनके आवास पर मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच करीब 45 मिनट मंत्रणा की। इसके बाद मुख्यमंत्री भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करने निकल गए थे। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र दिल्ली में, दून में चर्चाओं का बाजार गर्म
प्रदेश में बड़े सियासी उलटफेर की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सोमवार सुबह अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। उनके दिल्ली जाने के बाद देहरादून में अटकलों का बाजार गरमा उठा। दरअसल, मुख्यमंत्री को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक कार्यक्रम में भाग लेना था और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इंप्लायमेंट इंटर्नशिप एंड इनोवेशन का उद्घाटन करना था। 
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लेकिन गैरसैंण जाने के बजाय उन्होंने देहरादून से ही कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित किया और दिल्ली के लिए निकल गए।  उनके साथ विधायक व भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता मुन्ना सिंह व देहरादून नगर निगम के मेयर सुनील उनियाल गामा भी हैं। 

सियासी हलकों में चेहरा बदलने की अटकलें गरमाने लगी। हालांकि सीएम खेमे के लोगों का कहना था कि मुख्यमंत्री का दिल्ली जाना पहले ही से तय था। 18 मार्च को प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने पर राज्य सरकार ने सभी 70 विधानसभाओं में कार्यक्रम आयोजित करने हैं। मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम के बारे में चर्चा करने के लिए दिल्ली गए हैं। गैरसैंण के बजाय दिल्ली का रुख करने पर सीएम खेमे ने खराब मौसम का तर्क दिया।

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चार मंत्रियों और कई विधायकों के दिल्ली में डेरा डालने की चर्चाएं
मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने के बाद देहरादून में चर्चा गरमा उठी कि दिल्ली में सरकार के चार मंत्रियों और कई विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, अरविंद पांडेय और डॉ. हरक सिंह रावत के नाम हवाओं में तैर रहे थे। जबकि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और सुबोध उनियाल देहरादून में ही मौजूद थे। बाकी मंत्रियों के बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं थी। विधायकों के बारे में भी कोई स्पष्ट सूचना नहीं थी।

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भाजपा विधायकों को दिल्ली बुलाने की भी चर्चा
सियासी हवाओं में यह चर्चा भी गरमा उठी कि केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा के सभी विधायकों को दिल्ली तलब कर लिया है। हालांकि प्रदेश संगठन ने ऐसी किसी भी संभावना से इंकार किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भगत ने कहा कि सभी अपने क्षेत्रों में हैं।
 

दिल्ली में क्या हुआ, उत्तराखंड में सभी जानने को रहे बेताब 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली जाने के बाद उत्तराखंड की सियासत में यह सवाल गरमाता रहा कि दिल्ली में क्या हुआ? सियासी दलों के दफ्तरों से लेकर राज्य सचिवालय के गलियारों में हर दिल्ली की खबर जानने को बेताब था। देर रात तक अटकलों का बाजार गरमाता रहा।

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के पर्यवेक्षक भेजे जाने के बाद से ही प्रदेश की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि पार्टी और सीएम खेमा इन चर्चाओं का लगातार खंडन करता रहा। 

लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र अचानक दिल्ली के लिए उड़े तो चर्चाएं एक फिर तेजी से गरमाने लगी। इन चर्चाओं में सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन ही नहीं त्रिवेंद्र के संभावित उत्तराधिकारियों के नाम भी तैरने लगे। हालांकि संगठन के स्तर पर इन चर्चाओं का पूरी तरह से खंडन किया गया। उधर, राज्य सचिवालय में नौकरशाहों से लेकर अनुसेवकों तक सभी  की जुबान पर यह प्रश्न था कि मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली जाने के क्या सियासी मायने हैं? केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड में क्या करने जा रहा है? 
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बजट सत्र बीच में स्थगित करना भाजपा की अंदरूनी लड़ाई की पुष्टि : प्रीतम 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि बजट सत्र को बीच में छोड़ने से साबित हो रहा है कि भाजपा में जबरदस्त अंदरूनी घमासान है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष ने सदन के भीतर महंगाई, बेरोजगारी, किसान, मातृशक्ति पर लाठीचार्ज, आपदा प्रबंधन, गन्ना किसान सहित सभी जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरा।

सरकार का सदन के अंदर प्रदर्शन देखकर ही विपक्ष को इस बात का अंदाजा हो गया था कि सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उसकी पुष्टि शनिवार को देहरादून में सियासी भूचाल से हो गई। सदन में कोई भी मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे पाया। 

प्रीतम सिंह ने कहा कि बजट जैसे गंभीर मुद्दे के बावजूद त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके ज्यादातर विधायकों को भराड़ीसैंण के सत्र को बीच में छोड़कर देहरादून तलब किया जाना भाजपा में आये बड़े तूफान की ओर इशारा करता है।

 नेतृत्व परिवर्तन के सवाल को प्रीतम सिंह ने भाजपा का अंदरूनी मामला बताया और कहा कि केवल नेतृत्व परिवर्तन से भाजपा की असफलता छिपने वाली नहीं है। लोगों ने भाजपा को प्रचंड बहुमत और डबल इंजन वाली सरकार दी लेकिन भाजपा ने कदम-कदम पर जनता को निराश किया। 

प्रीतम सिंह ने कहा कि अब यह बात साफ हो गई है कि भाजपा सरकार का मन गैरसैंण में नहीं लगता। सरकार के पास विधायकों के क्षेत्र की समस्यायें सुनने का वक्त नहीं है। वह आपसी कलह निपटाने में पूरे चार साल व्यतीत कर गई। भाजपा का ध्येय मात्र सत्ता प्राप्ति ही रहता है। 
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