इस संबंध में जल्द ही मंत्रालय के स्तर पर एक वर्चुअल बैठक भी होने वाली है, जिसमें उत्तराखंड सरकार की ओर से अधिकारी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि प्रदेश के आगामी निकाय चुनाव से पहले ही ये सभी छावनी सिविल क्षेत्र राज्य के नगर निकायों के अधीन आ जाएंगे। हाल में राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने जहां लैंसडोन के पर्यटन विकास की गतिविधियों को बढ़ाने का मामला राज्यसभा में उठाया था तो वहीं विधायक दिलीप रावत लंबे समय से लैंसडोन छावनी के सिविल क्षेत्र को नगर निकाय के हवाले करने की मुहिम चला रहे हैं।
बदलाव से ये होगा लाभ
इन क्षेत्रों के नगर निकायों में शामिल होने के बाद लोगों के तमाम प्रमाणपत्रों से लेकर सभी विकास संबंधी कार्य नगर निकायों व संबंधित विकास प्राधिकरणों के अधीन आ जाएंगे। यहां छावनी बोर्ड के चुनाव के बजाए नगर निकाय चुनाव होंगे, जिनमें मेयर या पालिकाध्यक्ष चुने जाएंगे। हाउस टैक्स आदि कार्य भी निकाय में होंगे। विकास की गतिविधियों में तेजी आएगी क्योंकि छावनियों के पास अपेक्षाकृत कम बजट होता है।