प्रदेश सरकार के पास देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लेकर दो प्रमुख विकल्प है। पहला वह बोर्ड को भंग करने के लिए उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम को निरस्त करने के लिए विधानसभा में निरसन विधेयक लाए। सरकार ने 29 व 30 नवंबर को गैरसैंण में विधानसभा सत्र बुलाया है। साथ ही देवस्थानम बोर्ड पर 30 नवंबर से पहले बड़ा फैसला लेने की बात कही है।
सरकार के पास दूसरा विकल्प तीर्थ पुरोहित व पंडा समाज के लोगों के हितों को और अधिक सुरक्षित बनाते हुए देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का नया स्वरूप त कर सकती है। अधिनियम का एक ऐसा छाता तैयार करने के विकल्प की भी चर्चा है,जिसके नीचे बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति व चारधाम विकास परिषद के वजूद को लौटाया जा सके।
पंडा पुरोहित समाज से बहुत सौहार्दपूर्ण माहौल में वार्ता हुई। मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार किसी के हितों की अनदेखी नहीं करेगी। सरकार पंडा पुरोहित व पुजारी समाज के सम्मान के लिए तत्पर है।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
बहुत सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई। उनको आश्वस्त किया कि सरकार के किसी के हितों की विरोधी नहीं है। हर हाल में 30 नवंबर से पहले समस्या का समाधान कर लेंगे।
- सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री
बदरीनाथ धाम से जुड़ी बदरीश पंडा पंचायत, ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित व हकहकूकधारियों का कहना है कि देवस्थानम बोर्ड का विरोध जारी रहेगा, लेकिन केदारनाथ पहुंच रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध नहीं होना चाहिए। सनातन धर्म की परंपरा में अतिथि का सत्कार होता है। यदि प्रधानमंत्री मोदी बदरीनाथ भी आए तो उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
बदरीश पंडा पंचायत के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी ने कहा कि केदारनाथ दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध नहीं होना चाहिए। अतिथि का सत्कार भव्य तरीके से होना चाहिए। लेकिन देवस्थानम बोर्ड का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं किया जाएगा। इससे वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराएं गड़बड़ा रही हैं। प्रधानमंत्री के संज्ञान में भी यह बात जरूर आनी चाहिए।
बदरीनाथ ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष उमानंद सती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे को लेकर विरोध नहीं होना चाहिए, लेकिन उन्हें देवस्थानम बोर्ड का संज्ञान लेकर शीघ्र इसे भंग करने के निर्देश देने चाहिए। हमारा मुख्य उद्देश्य बोर्ड को भंग करने से है न कि किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना। उन्होंने कहा कि सभी हिंदूवादी संगठन चार धामों को बोर्ड से मुक्त करने की बात कर रहे हैं, लिहाजा प्रधानमंत्री को भी देवस्थानम बोर्ड को भंग कर देना चाहिए।