राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इससे प्रदेश के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। इससे पहले वर्ष 2016 से 2022 तक पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने की प्रक्रिया चली थी, लेकिन बाद में यह आगे नहीं बढ़ सकी। अब कैबिनेट के फैसले के बाद इसे दोबारा पूरा करने का रास्ता खुल गया है।
सचिव राजस्व एसएन पांडेय ने बताया कि संबंधित लोगों को एक वर्ष तक वर्ष 2004 के सर्किल रेट के हिसाब से निर्धारित राशि जमा करनी होगी। इसके बाद राशि वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
कैबिनेट ने उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952) में संशोधन को भी मंजूरी दी है। अधिकारियों के अनुसार, एक्ट में किए गए संशोधनों को नियमावली में शामिल किया गया है। इससे भूमिधरी और भूमि संबंधी मामलों की प्रक्रिया में सुविधा होगी।