उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री के दो पद इस सरकार में खाली ही रह सकते हैं। सत्ता में शामिल कुछ वरिष्ठ पूरी दमदारी से यह बात कह रहे हैं।
यहां दो अनार और दर्जन भर बीमार वाली स्थिति है। इसके अलावा विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं। ऐसे में हरीश रावत का दो मंत्री बनाकर अन्य से नाराजगी मोल लेना कहीं से भी समझदारी भरा कदम नहीं कहा जा रहा है। खबर यह भी है कि कांग्रेस आलाकमान ने संसद सत्र के बाद इस मुद्दे पर कोई बातचीत करने की बात कही है। वहीं नवंबर के आसपास आचार संहिता लागू हो जाएगी। अब कोशिश यही रहेगी कि किसी तरह इस मुद्दे को चर्चा भर तक ही सीमित रखा जाए।
मंत्री बनने के लिए करीब एक दर्जन कांग्रेसियों ने अपने दावेदारी ठोंक है। विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री के साथ हमेशा से मजबूती से खड़े रहने की दुहाई देकर तो सतपाल महाराज के खासमखास माने जाने वाले राजेंद्र भंडारी और अनुसुइया प्रसाद मैखुरी ने भी विपरीत परिस्थिति में कांग्रेस का साथ न छोड़ने की बात कहते हुए कैबिनेट में दावेदारी ठोक रखी है।
अपनी रायशुमारी के दम पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से सरकार की नैया सुरक्षित बचाकर लाने का दावा करते हुए नवप्रभात और गढ़वाल का झंडा बुलंद करते हुए गणेश गोदियाल भी इस लाइन में सबसे आगे खड़े हैं। कुमाऊं से तमाम सीटें जीतने के बावजूद कैबिनेट में केवल इंदिरा हृदयेश और यशपाल आर्य को जगह दिए जाने से भी नाराजगी है।
हरिद्वार जनपद में सर्वाधिक विधानसभा सीटें हैं ऐसे में वहां से किसी भी विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं देने का जोखिम रावत सरकार नहीं उठा सकती। इसकी के साथ अल्मोड़ा, हरिद्वार, पिथौरागढ़ के अलावा चंपावत से कोई मंत्री न होने का हवाला देते हुए तमाम विधायक मुख्यमंत्री को घेरे हैं।
ऐसे तमाम दावेदारों में से केवल दो को चुनना हरीश रावत के लिए बेहद मुश्किल माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस आलाकमान फिलहाल संसद के मानसून सत्र के चलते 13 अगस्त तक उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के मूड में नहीं है। वहीं आचार संहिता भी तीन माह बाद लागू होगी। माना जा रहा है कि जैसे बिना विस्तार के इतना लंबा वक्त बिता दिया गया, वैसे ही कुछ समय और गुजारकर इतिश्री करने में ही भलाई है।