प्रदेश में रुद्र प्रयाग को आपदा प्रबंधन तंत्र के लिहाज से मॉडल जिले के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका फैसला शुक्रवार को देर रात मुख्यमंत्री हरीश रावत की अगुवाई में उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
इसके तहत स्थानीय प्रशासन को किसी आपदा जैसी स्थिति में तात्कालिक तौर पर काम करने के लिए टेंडर आदि की औपचारिकता को दरकिनार करते हुए पांच करोड़ रुपये तक के वर्क आर्डर देने का अधिकार दिया गया है।
इससे अधिक राशि के कार्य राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। जिला अथॉरिटी को प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार होंगे साथ ही तकनीकी विंग भी होगा, ताकि राहत कार्यों में देरी न हो सके।
केदार धाम क्षेत्र में मुआवजे की नई व्यवस्था
केदारनाथ मंदिर के आसपास बने भवन और पंडे-पुरोहितों के पुनर्वास के लिए सरकार ने 90 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। जिलाधिकारी स्थानीय स्तर पर लोगों से बातचीत कर आम सहमति के आधार पर मंदिर से नीचे की ओर 50 फीट चौड़ा रास्ता तैयार कराएंगे।
वर्तमान सर्किल रेट (27000 रुपये ) वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं प्रभावित लोगों को अन्य स्थान पर भूमि और पुराने भवन के रकबे के बराबर निर्मित भवन दिया जाएगा।
सरकार ने पूर्व में क्षतिग्रस्त और आंशिक क्षतिग्रस्त आधार पर साढ़े आठ करोड़ रुपये मुआवजा दिया था। चूंकि अब मकान पूरी तरह ढहाए जाने हैं इसलिए इस हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। बताया गया है कि धाम क्षेत्र में 327 ऐसे मकान हैं जिन्हें ध्वस्त करके चौड़ा रास्ता तैयार किया जाएगा।