हाईकोर्ट के आदेश पर चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान की जद में आईं मलिन बस्तियां सरकार की छत्रछाया में बनी रहेंगी। कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश के मसौदे को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
तय हुआ है कि इन बस्तियों में रहने वालों के नियमितीकरण के अलावा पुनर्वासन और पुर्नस्थापन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तीन वर्ष का समय मसौदे में दर्ज किया गया है। इस कवायद से न केवल राजधानी बल्कि पूरे प्रदेश की मलिन बस्तियां फिलहाल किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बची रहेंगी। उधर हाईकोर्ट के आदेश के तहत सड़कों और उनके किनारों पर किए गए अतिक्रमण को तोड़ने की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शाम चार बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। इसमें कुल 12 विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें आठ को सर्वसम्मति से पास किया गया। इसमें सबसे पहला प्रस्ताव अवैध मलिन बस्तियों को तोड़ने के लिए अध्यादेश लाने के मसौदे से जुड़ा था। मसौदे में इन बस्तियों को नियमितीकरण करने के लिए वर्ष-2016 में बनाए गए एक्ट में संशोधन करने के साथ ही इन बस्तियों में रह रहे परिवारों को व्यवस्थित करने के लिए तीन वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि तक इनके खिलाफ होने वाली दंडात्मक कार्रवाई स्थगित रहेगी।
इस कार्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा राज्य सरकार की योजनाओं की मदद ली जाएगी। कैबिनेट से पास अध्यादेश के मसौदे को बृहस्पतिवार को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जहां से इसे जारी किए जाने की कार्रवाई होगी। इसके बाद छह माह के भीतर राज्य सरकार विधानसभा सत्र के दौरान इस अध्यादेश को विधेयक के रूप में पास करेगी।
बृहस्पतिवार को पूरा होगा चार सप्ताह का वक्त
बीती 18 जून को हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को देहरादून शहर का अतिक्रमण चार सप्ताह में ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। 26 जून को आदेश की कॉपी मिलने के बाद अतिक्रमण हटाओ टास्क फोर्स ने 28 जून से अभियान शुरू किया था। ऐसे में 26 जुलाई यानी बृहस्पतिवार को चार सप्ताह का समय समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सरकार हाईकोर्ट में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपेगी।
प्रदेश में अवैध बस्तियों पर एक नजर
कुल बस्तियां - पांच सौ चौरासी 584
कुल मकान - 180000
कुल आबादी - 1100000
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले
- किशोरी बालिका सेनेटरी नैपकिन योजना के अंतर्गत प्रति पैकेट आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रति पैकेट दो रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार छह करोड़ रुपए का रिवॉल्विंग फंड बनाएगी।
- लखनऊ में स्थित राज्य पुनर्गठन आयुक्त कार्यालय को बंद किया जाएगा। यहां कार्यरत स्टाफ को उत्तराखंड बुलाकर विभागों में समायोजित किया जाएगा।
- उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी संशोधन नियमावली को मंजूरी।
- न्यायालय शुल्क संशोधन विधेयक-2018 को मंजूरी। कोर्ट फीस ट्रेजरी के अतिरिक्त ई-पेमेंट से ली जा सकेगी।
- उत्तराखंड पुलिस निरीक्षक एवं उपनिरीक्षक सेवा नियमावली-2018 को मंजूरी।
- विश्व बैंक सहायतित उत्तराखंड परियोजना मे 25आईटीआई को चुनकर उन्हें अपग्रेड किया जाएगा।
- उत्तराखंड निवेश सम्मेलन-2018 के तहत विभिन्न समितियों के अलावा रोड-शो व अन्य कार्यक्रमों को मंजूरी।