पहाड़ों से पलायन रोकने और निजी पूंजी निवेश को पहुंचाने के लिए मंगलवार को उत्तराखंड कैनिबेट ने कुछ अहम फैसले लिए हैं। अब पहाड़ों में जमीन खरीदने की काजगी खानापूर्ति तीन महीने में पूरी हो जाएगी।
इतना ही नहीं जमीन खरीदने पर उसका लैंड यूज स्वत: ही बदल जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में बीजापुर गेस्ट हाउस में हुई कैबिनेट की बैठक छोटे-बड़े करीब 22 फैसले लिए गए हैं।
मुख्य सचिव सुभाष कुमार और अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने फैसलों की बाबत बताया कि अभी तक जमीन की खरीद-फरोख्त और लैंड यूज बदलने के चक्कर में महीनों-साल लग जाते थे। निवेशक को इस परेशानी से राहत मिलेगी।
निजी भूमि पर माइनिंग एक्ट से छूट
कैबिनेट ने निजी भूमि पर मिट्टी खुदाई में छूट दी है। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि अभी तक निजी भूमि में निर्माण के दौरान जेसीबी के माध्यम से मिट्टी निकालने या समतल आदि करने पर प्रतिबंध था जिसे हटा दिया गया है।
अपने प्लाट पर किसी को ऐसा करने के लिए विभाग से इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस राहत का लाभ पर्वतीय और मैदानी इलाकों को मिलेगा।
बाहरी नहीं कर सकेंगे बजरी-रेता का भंडारण
प्रदेश सरकार ने राज्य के बाहर के ऐसे किसी व्यक्ति को बजरी-रेता आदि के भंडारण के अधिकार पर प्रतिबंध लगा दिया है जिसका क्रशर प्रदेश में नहीं है।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि तीन जिलों देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार से शिकायतें आ रही हैं कि प्रदेश के बाहर के कुछ लोगों ने इन जिलों में बजरी-रेता आदि के भंडारण किए हैं। जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलता है। भंडारण के लिए इजाजत लेनी होगी और यह बताना होगा कि भंडारण की अनुमति क्यों चाहता है।
कारखाना अधिनियम में संशोधन
कैबिनेट ने कारखाना अधिनियम में भी बदलाव को मंजूरी दी है। अधिनियम में 14 सालों से किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया था। अब संशोधन के बाद लाइसेंस लेना, नवीनीकरण आदि से जुड़े शुल्क में मामूली बढ़ोत्तरी की गई है।
अब हर साल रिवाइज होगा सर्किल रेट
कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अब सर्किल रेट हर साल रिवाइज किए जाएंगे। अभी तक तीन साल में सर्किल रेट रिवाइज होते थे। जिन शहरों में सर्किल रेट अभी लागू नहीं हुए हैं। वहां पहली सितम्बर 2014 तक नए सर्किल रेट घोषित होंगे।
सरकार को जमीन देने पर स्टांप शुल्क नहीं
कैबिनेट ने उन दानदाताओं को राहत दी है कि जो सरकार को अपनी जमीन दान देते हैं। मुख्यसचिव ने बताया कि निजी तौर पर या फिर कोई संस्था अब अगर सरकार को अपनी जमीन दान देना चाहती है तो उससे स्टांप शुल्क नहीं लिया जाएगा। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि साल में 2-4 ऐसे मामले भी आते हैं।