सौर ऊर्जा इस्तेमाल करने वालों के लिए ग्रीन टैरिफ
पॉलिसी में यह प्रावधान किया गया है कि यूपीसीएल सौर ऊर्जा का एक ग्रीन टैरिफ प्रस्ताव तैयार करेगा, जो कि नियामक आयोग को भेजा जाएगा। नियामक आयोग उपभोक्ताओं के लिए ग्रीन टैरिफ चुनने का विकल्प दे सकता है। वहीं, पीक आवर्स में ग्रिड में सौर ऊर्जा देने वालों को फीड इन टैरिफ से प्रोत्साहित कर सकता है। आसान पहुंच व निगरानी के लिए वर्चुअल नेट मीटरिंग (वीएनएम) और ग्रुप नेट मीटरिंग (जीएनएम) का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उरेडा को बनाना होगा लैंड बैंक
नई पॉलिसी में उरेडा की जिम्मेदारियां भी बढ़ाई गई हैं। इसके तहत उरेडा को एक सोलर पॉलिसी सेल की स्थापना करनी होगी, जिसके तहत सिंगल विंडो के माध्यम से सोलर प्रोजेक्ट को पास किया जाएगा। उरेडा को लैंडबैंक बनाना होगा। सभी सरकारी जमीनें और भवनों की सूची बनानी होगी, जहां सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लग सकते हैं। इसी प्रकार, ऐसी निजी भूमि भी चिन्ह्ति करनी होंगी, जिन पर कोई प्राइवेट व्यक्ति लीज पर अपना प्रोजेक्ट लगा सके।
नई नीति से यह मिलेंगे फायदे
- सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट लगेंगे।
- लैंड यूज परिवर्तन शुल्क, न्यायालय शुल्क, पंजीकरण, भूमि उपयोग अनुमोदन, बाहरी विकास शुल्क, जांच शुल्क और बुनियादी ढांचा विकास शुल्क में छूट मिलेगी।
- जो भी प्रोजेक्ट लगेगा, यूपीसीएल को अनिवार्य तौर पर उससे बिजली खरीदनी होगी। इससे निवेशकों का जोखिम कम होगा।
- फीड इन टैरिफ के माध्यम से अतिरिक्त बिजली उत्पादन करने वाले उपभोक्ताओं को मुआवजा मिलेगा। वहीं, दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास एवं स्वरोजगार योजना को भी इससे लाभ पहुंचेगा।
- अपने उपयोग के लिए और सामूहिक उपयोग के लिए निर्बाध अभिगम और एसजीएसटी व बिजली शुल्क में छूट मिलेगी।