दूसरी ओर कांग्रेस इस उपचुनाव को आने वाले विधानसभा उपचुनाव का लिटमस टेस्ट मानकर चल रही है। ऐसे में कांग्रेस की इस उपचुनाव के जरिये विधानसभा चुनाव में मनोवैज्ञानिक रूप से बढ़त बनाने की कोशिश है।
कांग्रेस की ओर से अभी तक दो दावेदारी सामने आई हैं। पहली दावेदारी इसी क्षेत्र के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के बेटे विक्रम रावत की है। वहीं, पिछले चुनाव में कम मार्जिन से हारीं कांग्रेस कि रनर अप प्रत्याशी भी दावा कर रहीं हैं।
आम आदमी पार्टी भी मैदान में
पिछले कुछ समय में प्रदेश में आप ने भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है। आप भी सीट पर उपचुनाव में दावा ठोक सकती है। ऐसे में उपचुनाव में आप की भी परीक्षा होगी और परिणाम पर इसका फर्क पड़ने से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
क्या तीरथ हो सकते हैं उम्मीदवार?
इस उपचुनाव का एक दिलचस्प सवाल यह भी है कि क्या मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत उपचुनाव के उम्मीदवार हो सकते हैं? जानकार इसके पक्ष में यह तर्क दे रहे हैं कि इस सीट पर गढ़वाल का भी प्रभाव है। सल्ट महादेव का इलाका तीरथ सिंह रावत के लिए खासा मुफीद साबित हो सकता है।