उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बीच बसों के फेरे पर शुरू हुआ विवाद अब कुछ थमने की उम्मीद है। शासन के हस्तक्षेप के बाद उत्तराखंड परिवहन विभाग ने यूपी की सीज की गई सभी 17 बसों को छोड़ दिया है लेकिन उत्तर प्रदेश ने शुक्रवार देर शाम तक उत्तराखंड की 78 बसों को नहीं छोड़ा गया था।विवाद मंगलवार रात शुरू हुआ था, जब संभागीय परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम ने यूपी बार्डर से लगे आशारोड़ी चेकपोस्ट पर यूपी रोडवेज बसों की चेकिंग शुरू की। मालूम हुआ कि यूपी के विभिन्न डिपो की कई बसें बिना परमिट के ही दून आईएसबीटी से चलाई जा रही थीं।इसके अलावा यूपी की बसों के उत्तराखंड परिवहन निगम से हुए समझौते में तय संख्या से अधिक फेरे लगाने की बात भी सामने आई। इस पर उत्तराखंड ने यूपी की 17 बसों को सीज कर लिया। उधर, जानकारी मिलते ही यूपी में भी उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों की चेकिंग शुरू हो गई। यूपी ने उत्तराखंड की 78 बसें सीज कर दीं।
उत्तराखंड ने छोड़ी यूपी की सभी बसें
बृहस्पतिवार को उत्तराखंड शासन ने निगम प्रबंधन को विवाद निपटाने के निर्देश दिए। उसके बाद उत्तराखंड परिवहन विभाग ने यूपी की सभी 17 बसें छोड़ दी जबकि यूपी ने शुक्रवार तक भी बसों को नहीं छोड़ा।दिल्ली के लिए बसों का टोटा
एक साथ उत्तराखंड की 78 बसों के सीज होने से दून से दिल्ली जाने वाली बसों का टोटा हो गया है। शुक्रवार को यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आईएसबीटी में यात्रियों को उत्तराखंड रोडवेज की बसें भी कम मिली और उप्र की सेवाएं कम होने से परेशानी बढ़ी रही।मंत्री ने ली क्लास
दो राज्यों के बीच बस संचालन के विवाद में शुक्रवार को परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश ने रोडवेज अधिकारियों संग बैठक की। यमुना कालोनी स्थित आवास में मंत्री ने कहा कि 11 साल बाद भी दोनों राज्य एक ठोस समझौता नहीं कर सके। उन्होंने जल्द से जल्द फेरे तय करने के निर्देश दिए।