‘अमर्यादित व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं’
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने संसदीय कार्यमंत्री व विपक्ष के विधायकों को बार-बार सीट पर बैठने का आग्रह करती रहीं। लेकिन, किसी ने भी स्पीकर की बात नहीं मानी। इस पर नाराज विस अध्यक्ष बोल पड़ीं, मुख्यमंत्रीजी मंत्री को बैठने के लिए बोलिए। उनके सख्त अंदाज के बाद ही हंगामा शांत हुआ। कहा, यदि पक्ष-विपक्ष आपस में बोलेंगे तो कुर्सी पर बैठना बेकार है। स्पीकर ने व्यवस्था के प्रश्न पर विनिश्चय दिया कि राज्यपाल अभिभाषण के दौरान अमर्यादित व्यवहार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि सदन संचालन को लेकर सदस्यों को आपत्ति थी तो अभिभाषण के बाद सदन में उठा सकते थे। पूर्व में भी सदन में अमर्यादित व्यवहार करने पर कुछ सदस्यों को निलंबित किया गया था। उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा के अनुसार व्यवहार व मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
कांग्रेस को गलती पर मांगनी चाहिए माफी : अग्रवाल
संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा, राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस का जो रवैया था, उससे साफ है कि वह सदन नहीं चलने देना चाहती है। अभिभाषण के समय कांग्रेस विधायक ने जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया, वह उत्तराखंड की संस्कृति व सदन की गरिमा के खिलाफ है। मैंने आंशका जताई थी लेकिन यह नहीं कहा कि विधायक ने शराब पी रखी है। गलती पर माफी मांगने के बजाय कांग्रेस ने दूसरे दिन भी सदन हंगामा किया।
शराब पीने के आरोप पर मानहानि का दावा करूंगा : मदन बिष्ट
द्वाराहाट से कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट ने कहा, संसदीय कार्य मंत्री का ऐसा व्यवहार मैंने कभी जिंदगी में नहीं देखा। मंत्री ने मुझे कहा, सदन से बाहर जाकर प्रदर्शन कर। मेरे ऊपर सदन में शराब पीकर आने के आरोप लगाए। इस पर मानहानि का दावा करूंगा। मैं डर-डर कर राजनीतिक नहीं करता। जब सरकार भ्रष्टाचार व चोरी कर रही है तो सदन में बोलेंगे।