आय के सीमित साधन होने की वजह से खुले बाजार से कर्ज लेने की लत सरकार की शायद ही टूटेगी। इस हिसाब से कर्ज के ब्याज लौटाने पर ही सरकार को 2021-22 तक 7271 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। कुल मिलाकर पिछली सभी सरकारों की तरह त्रिवेंद्र सरकार भी वेतन, पेंशन और ब्याज के त्रिकोण में फंसी है और इससे बाहर निकलना उसके लिए आसान नहीं है।
लगातार बढ़ता जा रहा है वेतन, पेंशन और ब्याज का खर्च
मद 2016-17 2017-18 2018-19 2019-20 2020-21 2021-22
वेतन 9,570 11,212 13765 15279 16,960 18826
पेंशन 3,170 4272 5,352 6,958 9,045 11,759
ब्याज 3,723 4,178 4,906 5,627 6398 7,271
कुल 16,464 20,141 24,024 27,865 32,404 37,856
नोट: आंकड़े भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के हैं। 2016-17 के आंकड़े वास्तविक हैं। बाकी संकेतक हैं।
सरकार का सालाना राजस्व व्यय
वर्ष बजट वेतन/पेंशन/ब्याज प्रतिशत
2016-17 35609 46.23
2017-18 42,725 47.14
2018-19 45585 52.70
2019-20 48663 57.26
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नोट: आंकड़े प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के हैं।