बागपत की घटना से भले ही उत्तराखंड की पुलिस शर्मसार हुई हो लेकिन 11 साल पहले एक बुजुर्ग सिपाही ने जो हौसला दिखाया था उसे आज भी पूरा हरिद्वार जिला याद करता है।
बदमाशों से लोहा लेने के लिए जवान होना या आधुनिक हथियार रखना मायने नहीं रखता। चाहिए तो बस दिलेरी। हौसला हो तो किसी भी उम्र और हथियार से बदमाशों को ढेर किया जा सकता है। बाबूराम का कारनामा कुछ यही सबक दे रहा है।
बागपत में एके-47 और एसएल आर लिए हुए युवा सिपाही बदमाशों के सामने अपनी जान बचाने के लिए छिपते नजर आए लेकिन 11 साल पहले 55 वर्षीय सिपाही बाबूराम ने पुलिस हिरासत से भाग रहे तीन बदमाशों को पुरानी थ्री नॉट थ्री रायफल की एक ही गोली से ढेर कर दिया था। इस बुजुर्ग सिपाही बाबूराम की दिलेरी को लोग इस समय बड़ी शिद्दत से याद कर रहे हैं।