बदरीनाथ सीट विधायक राजेंद्र भंडारी के त्यागपत्र देने से खाली हुई है। भंडारी ने भाजपा की सदस्यता लेने से पहले विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। सीट पर उन्हें ही उम्मीदवार बनाया जाना तय माना जा रहा है। मंगलौर सीट पर बसपा के सरबत करीम अंसारी विधायक थे। अंसारी के असामयिक निधन से यह सीट खाली हो गई। यह सीट करीब छह माह से खाली है। दोनों सीटों पर चुनाव आयोग कभी भी उपचुनाव की घोषणा कर सकता है।
निकाय चुनाव की चुनौती भी
उपचुनाव के साथ ही भाजपा-कांग्रेस के सामने निकाय चुनाव की चुनौती है। सरकार कोर्ट में हलफनामा दे चुकी है कि वह तय समय पर निकाय चुनाव कराने के लिए तैयार है। अभी निकायों की कमान प्रशासकों के हाथों में हैं। उनका कार्यकाल दो जून को समाप्त हो रहा है। इस लिहाज से निकाय चुनाव भी दरवाजे पर दस्तक दे रहे, लेकिन दोनों ही राजनीतिक दल जिस तरह निकाय चुनाव की मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर मोर्चा खोल चुके हैं, उससे चुनाव और आगे खिसकने के आसार बन रहे हैं।