कोर्ट के आदेश पर 2018 में आरक्षण पर खत्म
2013 में एक याचिका पर उच्च न्यायालय ने राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दिए जा रहे 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के शासनादेश पर रोक लगा दी थी। कोर्ट के आदेश के बाद 2018 में तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार ने आरक्षण की अधिसूचना को निरस्त कर दिया था।
2015 में हरीश रावत सरकार में आया विधेयक
राज्य आंदोलनकारियों का राजकीय सेवाओं में क्षैतिज आरक्षण बहाल करने के लिए वर्ष 2015 में तत्कालीन हरीश रावत सरकार विधानसभा में विधेयक लाई। विधेयक पारित कराकर राजभवन भेजा गया।
सात साल बाद राजभवन से लौटा विधेयक
राजभवन से सात साल बाद विधेयक लौटा। सात सालों में कई बार राज्य आंदोलनकारी संगठनों ने सरकारों पर दबाव बनाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यपाल से विधेयक लौटाने का अनुरोध किया। उनकी मांग राज्यपाल ने विधेयक लौटा दिया।
राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण का विधेयक राजभवन से लौट गया है। न्याय विभाग से इस पर विचार-विमर्श हो रहा है। सरकार अब नए सिरे से संशोधित विधेयक लाएगी।
- शैलेश बगौली, सचिव, मुख्यमंत्री