कुछ इस तरह से की गई हैं गड़बड़ियां...
गड़बड़ी कैसे की गई, उदाहरण के तौर पर हम इसे ऐसे समझते हैं। एक किसान जिसका खाता संख्या 144 है। किसान ने 0.773 हेक्टेयर जमीन पर धान उगाना दिखाया है, जबकि जांच में सामने आया है किसान के पास मात्र 0.126 भूमि है। किसान ने भूलेख पोर्टल पर जो खसरा नंबर दर्शाया है, उस पर कब्रिस्तान है। एक अन्य मामले में किसान की ओर से खाता संख्या 00156 में कुल जमीन 2.09 दर्शायी गई है, जबकि किसान के खाते में मात्र 0.3670 जमीन दर्ज है। दर्शायी गई जमीन पर एक इंटर कॉलेज स्थापित है, जिसका मालिक कोई और है। जांच में ऐसे करीब 46 मामले पकड़ में आए हैं।
किसान, सेंटर इंचार्ज और मिलर की मिलीभगत
यूपी, बिहार से सस्ता धान लेकर मिलर उसे उत्तराखंड के किसान से खरीदना दिखाकर चांदी काट रहे हैं। उत्तराखंड में सरकार की ओर से धान का समर्थन मूल्य 1960 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया गया है। किसान को अपना धान खरीद केंद्रों पर बेचने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। इस पर किसान को एक आईडी नंबर मिल जाता है। इसमें गांव, जमीन, खसरा नंबर इत्यादि की पूरी जानकारी होती है। किसान की ओर से दी गई जानकारी का सत्यापन करना प्रशासन की जिम्मेदारी होता है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। किसानों के नाम अतिरिक्त भूमि दिखाकर उनके नाम पर बाहर से खरीदा गया धान बेचा जा रहा है। इस खेल में किसान, सेंटर इंचार्ज से लेकर मिलर तक की भूमिका संदिग्ध है।
धान खरीद केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। कुछ केंद्रों की जांच पूरी कर ली गई है, जबकि कुछ केंद्रों की जांच जारी है। जिन केंद्रों में गड़बड़ी मिली है, खाद्य आपूर्ति विभाग को कार्रवाई के लिखा गया है। आगे से इस तरह की गड़बड़ी न हों, इसके लिए सरकार को सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव करने के सुझाव दिए गए हैं, ताकि जब किसान धान उगाए, तभी उसका पंजीकरण हो। किसान के साथ धान के खेत की भी फोटो अपलोड करने की व्यवस्था हो।
- युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी, ऊधमसिंह नगर