तापमान में बढ़ोतरी
उत्तराखंड के उत्तरी ग्लेशियर क्षेत्रों में सतही तापमान में वृद्धि देखी गई है। दक्षिणी हिस्सों में भी तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहा जबकि रुड़की और बागेश्वर जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में बदलाव अलग-अलग दशकों में स्पष्ट रूप से दिखे।
अरब सागर की नमी बन रही उत्तराखंड में आफत
मौसम विभाग के निदेशक रहे बिक्रम सिंह और वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने प्रदेश में बादल फटने की घटनाओं पर एक शोध पत्र प्रकाशित किया था। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि अरब सागर से निकलकर राजस्थान, हरियाणा के रास्ते आने वाली तेज दक्षिण-पश्चिमी हवाएं अपने साथ नमी लेकर आती हैं। जब ये हवाएं पश्चिमी हिमालय की पहाड़ियों से टकराती हैं, तो तेजी से ऊपर उठती हैं। इससे बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने ये भी बताया था कि उत्तराखंड में बादल फटने का समय ज्यादातर तड़के सुबह होता है। इसका कारण है कि रात्रि में वातावरण ठंडा होने से ओसांक के पास तापमान पहुंच जाता है, जिससे बादल बनने की आशंका बढ़ जाती है। उनका यह शोध जनवरी 2022 में प्रकाशित हुआ है।
अगस्त में ही औसत के करीब पहुंची बारिश
प्रदेश में मानसून सीजन में औसतन 1162.7 मिमी बारिश होती है। इस बार 23 अगस्त तक ही यह आंकड़ा इसके करीब पहुंच चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 1031 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। इस अवधि तक सामान्यत: 904.2 मिमी बारिश होती है। विभाग ने 14 प्रतिशत अधिक बारिश बताई है। अभी करीब 20 सितंबर तक मानसून रहने की उम्मीद है। ऐसे में औसत से काफी अधिक बारिश होने का अनुमान जताया जा रहा है।